भारत की शान और वीरता का प्रतीक बन चुके 10 वर्षीय श्रवण सिंह को इस वर्ष प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025-26 से सम्मानित किया गया। यह सम्मान भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष उन बालकों को दिया जाता है, जिन्होंने असाधारण साहस, देशभक्ति और समाज सेवा में विशिष्ट योगदान दिया हो। इस वर्ष यह पुरस्कार उन्हें उनकी अद्वितीय बहादुरी और भारतीय सेना के प्रति निष्ठा के लिए दिया गया।

श्रवण सिंह, जो पंजाब के फिरोजपुर जिले के निवासी हैं, ने अपने सामान्य जीवन से कहीं अधिक साहसिक कदम उठाते हुए भारतीय सेना के जवानों की सहायता की। वे नियमित रूप से सीमा क्षेत्र में तैनात सैनिकों तक पानी, दूध, लस्सी, चाय और बर्फ पहुंचाते थे। यह कार्य उन्होंने कठिन और खतरनाक परिस्थितियों में किया, जिससे उनकी निडरता और देशभक्ति का परिचय मिलता है। उनकी यह सेवा उन्हें “युवतम नागरिक योद्धा” के रूप में भारतीय सेना द्वारा मान्यता दिलाई।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार एक उच्चतम नागरिक सम्मान है, जो प्रत्येक वर्ष बालकों को उनकी विशिष्ट उपलब्धियों के लिए प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार प्रत्येक वर्ष वीर बाल दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाता है। इस वर्ष राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने श्रवण सिंह को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया।

इस पुरस्कार के तहत बच्चों को उनकी बहादुरी, साहस, समाज सेवा, कला, संस्कृति और विज्ञान में विशेष योगदान के लिए सम्मानित किया जाता है। श्रवण सिंह का यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत साहस की पुष्टि करता है, बल्कि युवा पीढ़ी में देशभक्ति और सेवा भाव की प्रेरणा भी जगाता है। उनके इस योगदान की वजह से भारतीय सेना ने उनकी शिक्षा और भविष्य की देखभाल का संकल्प भी लिया।

श्रवण के प्रयास और साहस की कहानी यह दर्शाती है कि किसी भी उम्र के बच्चे समाज और राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उनकी प्रतिबद्धता और निस्वार्थ सेवा ने न केवल सैनिकों का मनोबल बढ़ाया, बल्कि पूरे समाज को यह संदेश दिया कि सच्ची बहादुरी और देशभक्ति की कोई आयु सीमा नहीं होती।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित होना किसी भी बालक के लिए अत्यंत गौरव की बात है। श्रवण सिंह ने इस पुरस्कार के माध्यम से यह साबित कर दिया कि साहस, निष्ठा और सेवा की भावना जीवन में किसी भी उम्र में निखारी जा सकती है। यह सम्मान उनके प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने के साथ-साथ युवाओं में प्रेरणा का स्रोत भी बन गया है।

इस ऐतिहासिक सम्मान के माध्यम से श्रवण सिंह का नाम भारत के उन विशिष्ट बालकों की सूची में दर्ज हो गया है, जिन्होंने साहस और निष्ठा के मामले में असाधारण योगदान दिया है। उनकी कहानी न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत बनी है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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