महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर में आगामी सिंहस्थ कुंभमेले की तैयारियों के बीच कुशावर्त तीर्थ पर धार्मिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ 31 फीट ऊंचे ध्वजस्तंभ का पूजन किया गया। शुक्रवार सुबह आयोजित इस समारोह में राज्य के जल संसाधन मंत्री तथा नाशिक जिले के पालकमंत्री गिरीश महाजन ने विधिवत ध्वजस्तंभ पूजन किया। इस अवसर पर कुंभमेले की तैयारियों, विकास कार्यों की समयबद्ध पूर्ति और श्रद्धालुओं की भीड़ के प्रभावी प्रबंधन पर जोर दिया गया।

पालकमंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि सिंहस्थ कुंभमेले के मद्देनजर त्र्यंबकेश्वर में श्रद्धालुओं की भीड़ का प्रभावी प्रबंधन करने, विभिन्न कार्यों की सूक्ष्म योजना तैयार करने और विकास कार्यों को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने राष्ट्रपति महोदय के नियोजित दौरे के मद्देनजर संबंधित विभागों और प्रशासनिक एजेंसियों को आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी करने की बात भी कही।

सिंहस्थ कुंभमेले के सफल आयोजन के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं, श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं, सुरक्षा व्यवस्था और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण बताया गया। सभी संबंधित विभागों को आपसी तालमेल के साथ काम करते हुए निर्धारित योजना के अनुसार कार्यों में तेजी लाने पर जोर दिया गया।

ध्वजस्तंभ पूजन समारोह में विधायक हिरामण खोसकर, नगराध्यक्ष त्रिवेणी तुंगार, उपनगराध्यक्ष पल्लवी शिरसाट, सार्वजनिक निर्माण विभाग की मुख्य अभियंता अरुंधती शर्मा, पुलिस अधीक्षक डॉ. डी. एस. स्वामी, सहायक धर्मादाय आयुक्त विवेक सोनुने, सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता देवेंद्र पवार, नाशिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभमेला प्राधिकरण के अतिरिक्त आयुक्त कमलाकर रणदिवे, निवासी उपजिलाधिकारी रोहितकुमार राजपूत, उपविभागीय अधिकारी डॉ. पवन दत्ता, तहसीलदार गणेश जाधव, खंड विकास अधिकारी श्र. सानप और मुख्याधिकारी गोविंद जाधव उपस्थित रहे।

इसके अलावा त्र्यंबकेश्वर पुरोहित संघ के अध्यक्ष मनोज थेटे, नाशिक पुरोहित संघ के सतीश शुक्ल, जनप्रतिनिधि, विभिन्न अखाड़ों के प्रमुख, साधु-संत, महंत, श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में समारोह में शामिल हुए।

धार्मिक परंपरा और आस्था के संगम के रूप में आयोजित इस समारोह ने सिंहस्थ कुंभमेले की तैयारियों के संदर्भ में त्र्यंबकेश्वर की व्यवस्थाओं को विशेष महत्व दिया। श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय के साथ कार्य करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

ध्वजस्तंभ की संरचना भी इस समारोह का प्रमुख आकर्षण रही। इसकी ऊंचाई 31 फीट है और इस पर समुद्र मंथन की संकल्पना को साकार किया गया है। मंथन से प्राप्त रत्नों को ध्वज पर दर्शाया गया है। ध्वजस्तंभ के निचले हिस्से में भगवान श्री गणेश की प्रतिमा बनाई गई है, जबकि सबसे ऊपरी हिस्से में अमृत कलश धारण किए हुए गरुड़ की प्रतिमा स्थापित की गई है। धार्मिक प्रतीकों से सुसज्जित यह ध्वजस्तंभ आगामी सिंहस्थ कुंभमेले की तैयारियों के बीच आयोजित पूजन समारोह का केंद्र रहा।

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