नासिक: दूषित पानी से त्वचा रोग, 109 मरीज मिले और 50 बोरवेल सील
नगर निगम ने अंबड एमआईडीसी के दत्तनगर में बोरवेल का पानी पीने से त्वचा रोग फैलने की आशंका के चलते यह कार्रवाई शुरू की है।

तस्वीर में नासिक के दत्तनगर क्षेत्र में रखे बर्तनों में भरा हुआ दूषित और पीले रंग का पानी दिखाई दे रहा है।
नासिक शहर के अंबड एमआईडीसी क्षेत्र के दत्तनगर में दूषित पानी की समस्या ने नागरिकों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यहां त्वचा रोग के लक्षण सामने आने के बाद नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों की जांच शुरू की है। अब तक 248 लोगों की जांच की जा चुकी है, जिनमें से 109 नागरिकों में त्वचा रोग के लक्षण मिले हैं। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, इस समस्या का संभावित संबंध बोरवेल के पानी से हो सकता है। हालांकि, पानी के नमूनों की जांच रिपोर्ट आना अभी बाकी है।
दत्तनगर क्षेत्र में बोरवेल के पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई जा रही है। अंबड एमआईडीसी के दत्तमंदिर चौक, तुलजाभवानी मंदिर, कारगिल चौक और दत्तनगर क्षेत्र पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। नगर निगम की ओर से संदिग्ध मरीजों की जानकारी जुटाने, प्रभावित क्षेत्रों में सर्वेक्षण करने और नागरिकों के स्वास्थ्य की जांच करने जैसी कार्रवाई की जा रही है।
प्रारंभिक सर्वेक्षण में सामने आया है कि कई नागरिक घरेलू उपयोग के लिए बोरवेल के पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ स्थानों पर पानी पीले या हरे रंग का दिखाई देने की जानकारी भी दर्ज की गई है। इसके बाद नगर निगम की चिकित्सा टीम ने क्षेत्र में जांच अभियान चलाया। अब तक 248 नागरिकों की जांच में 109 लोगों में त्वचा रोग के लक्षण पाए गए हैं। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद क्षेत्र में जलापूर्ति की सुरक्षा का मुद्दा गंभीर हो गया है।
त्वचा रोग के सटीक कारण का पता लगाने के लिए बोरवेल के पानी के नमूने जीवाणुजनित और रासायनिक जांच के लिए भेजे गए हैं। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नागरिकों में सामने आए त्वचा रोग का पानी से संबंध है या नहीं। फिलहाल, पानी को ही इन बीमारियों का कारण मानने के लिए आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
दूषित पानी की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम ने क्षेत्र में बोरवेल का सर्वेक्षण शुरू किया है। इस दौरान करीब 50 बोरवेल सामने आई हैं, जिन्हें सील करने की प्रक्रिया शुरू होने की खबर है। इसके साथ ही नागरिकों को सुरक्षित पानी उपलब्ध कराने के लिए जलापूर्ति बढ़ाने की योजना भी बनाई गई है।
दत्तनगर क्षेत्र में प्रतिदिन होने वाली 30 लाख लीटर पानी की आपूर्ति में अतिरिक्त पांच लाख लीटर पानी जोड़ने की योजना है। इसके अलावा, नागरिकों को पानी संग्रहित करने के लिए टंकियां उपलब्ध कराने और नल कनेक्शनों की व्यवस्था बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा।
दत्तनगर में 248 लोगों की जांच के दौरान 109 नागरिकों में त्वचा रोग के लक्षण मिलने और करीब 50 बोरवेल को सील करने की प्रक्रिया शुरू होने के बीच अब पानी के नमूनों की रिपोर्ट अहम होगी। इससे क्षेत्र में दूषित पानी की आशंका और नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़े सवालों पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

Pratahkal Bureau
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