वर्ली सीवेज प्लांट का 63% काम पूरा, 500 एमएलडी क्षमता वाला प्रोजेक्ट सितंबर 2027 तक होगा चालू
मुंबई के वर्ली में 500 एमएलडी क्षमता वाले आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का 63 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। बीएमसी ने 30 सितंबर 2027 तक इसे चालू करने का लक्ष्य रखा है। जानिए मेम्ब्रेन बायोरिएक्टर तकनीक और 250 एमएलडी पानी के उच्च स्तरीय शुद्धिकरण की पूरी योजना।

वर्ली में बीएमसी द्वारा बनाए जा रहे 500 एमएलडी क्षमता के मलजल प्रक्रिया केंद्र का निर्माण कार्य।
मुंबई के समुद्र तटीय इलाकों में प्रदूषण कम करने और समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा के उद्देश्य से बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा वर्ली में बनाए जा रहे 500 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) क्षमता वाले आधुनिक मलजल प्रक्रिया केंद्र का 63 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। बीएमसी प्रशासन ने इस महत्वपूर्ण परियोजना को 30 सितंबर 2027 तक पूरी तरह चालू करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्लांट के शुरू होने से मुंबई के तटीय समुद्र के पानी की गुणवत्ता में सुधार होने और जलीय पर्यावरण को लाभ मिलने की उम्मीद है।
इस अत्याधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में गंदे पानी के शोधन के लिए मेम्ब्रेन बायोरिएक्टर जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तकनीक के माध्यम से प्रतिदिन 500 एमएलडी गंदे पानी का प्राथमिक उपचार किया जाएगा। इसमें से 250 एमएलडी पानी को तीसरे स्तर की प्रक्रिया से गुजारकर उच्च स्तर पर शुद्ध किया जाएगा।
वर्तमान में वर्ली में संचालित पुराना प्लांट गंदे पानी से कचरा और मिट्टी अलग करने जैसी बुनियादी प्रक्रियाएं ही पूरी करता है। इसके बाद उपचारित पानी को गहरे समुद्र में छोड़ा जाता है, ताकि वह समुद्र के पानी में मिल सके। नए प्लांट के निर्माण के दौरान भी पुराने केंद्र का संचालन और रखरखाव लगातार जारी रखा गया है। इससे मुंबई की सीवेज प्रणाली का कामकाज प्रभावित नहीं हुआ है।
नया प्लांट पूरी तरह चालू होने के बाद समुद्र में छोड़े जाने वाले पानी के शोधन का स्तर बेहतर होगा। परियोजना के तहत 500 एमएलडी पानी के प्राथमिक उपचार और उसमें से 250 एमएलडी पानी के तीसरे स्तर के शुद्धिकरण की व्यवस्था की जा रही है। इससे वर्ली और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता सुधारने तथा जलीय पर्यावरण को लाभ पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बीएमसी की इस परियोजना का निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ रहा है। 63 प्रतिशत काम पूरा होने के बाद अब प्रशासन का लक्ष्य 30 सितंबर 2027 तक इसे पूरी तरह चालू करना है। परियोजना पूरी होने पर मुंबई में मलजल के शोधन की व्यवस्था को आधुनिक बनाने और तटीय समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकेगा।

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