पूर्व महापौर विशाखा राउत की बढ़ीं मुश्किलें, जाति प्रमाण पत्र रद्द होने के बाद पद पर संकट
विशाखा राउत का जाति प्रमाण पत्र रद्द होने के बाद बीएमसी सदस्य पद पर संकट गहरा गया है। सोमवार को पद रद्द होने का ऐलान संभव है।

मुंबई बीएमसी की पूर्व महापौर और वार्ड नंबर 191 की नगरसेविका विशाखा राउत की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पालघर जाति जांच समिति ने उनका जाति प्रमाण पत्र रद्द कर दिया है। इसके बाद उनका बीएमसी सदस्य पद खत्म करने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
बीएमसी कमिश्नर ने राज्य के नगर विकास विभाग को पत्र भेजकर विशाखा राउत का नगरसेविका पद रद्द करने और उन पर अगले छह साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की सिफारिश की है। विशाखा राउत ने जाति जांच समिति के फैसले के खिलाफ अदालत में अर्जी दाखिल की थी, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी।
जांच के दौरान बीएमसी चुनाव में विशाखा राउत द्वारा जमा किए गए जाति प्रमाण पत्र से जुड़े सबूत और रिश्ते साबित नहीं हो सके। इसी आधार पर जाति जांच समिति ने उनके प्रमाण पत्र को गलत करार देते हुए रद्द कर दिया।
अब आने वाले सोमवार को बीएमसी की बैठक में उनके नगरसेविका पद को रद्द किए जाने का आधिकारिक ऐलान होने की संभावना है। बीएमसी कानून के नियमों के मुताबिक, किसी नगरसेविका का जाति प्रमाण पत्र अवैध पाए जाने पर उसे अपना पद गंवाना पड़ता है। इसके अलावा, पद पर रहते हुए मिले सभी भत्ते और वेतन भी वापस लौटाने पड़ सकते हैं।
विशाखा राउत के खिलाफ हुई इस कार्रवाई को मुंबई बीएमसी की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

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