प्रख्यात कलाकार विराग मधुमालती को भगवान भैरव पर 1,107 भक्तिगीतों की रचना के लिए वर्ल्ड रिकॉर्ड से सम्मानित किया गया।

मुंबई। प्रख्यात गायक, कलाकार, लेखक, निर्देशक, समाजसेवी एवं बहु-विश्व रिकॉर्ड धारक विराग मधुमालती की बहुप्रतीक्षित कृति ‘भक्ति का महासागर’ का भव्य लोकार्पण सानपाड़ा स्थित शिखारा होटल में गरिमामय समारोह के दौरान सम्पन्न हुआ। भगवान भैरव को समर्पित 1,107 मौलिक भक्तिगीतों के इस अद्वितीय संकलन का लोकार्पण भारत के सुप्रसिद्ध भजन सम्राट पद्मश्री अनुप जलोटा तथा अखिल भारतीय मराठी चित्रपट महामंडल के अध्यक्ष मेघराज राजे भोसले के करकमलों से किया गया।

समारोह में वंदना वानखड़े, मोतीलाल जैन, अर्जुन जी सिंघवी (पूर्व अध्यक्ष, नवी मुंबई एजुकेशन), निलेश सोमाणी सहित अनेक गणमान्य अतिथि एवं मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

इस अवसर पर वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बुक ऑफ इंडिया ने विराग मधुमालती को भगवान भैरव पर एक वर्ष के भीतर सर्वाधिक 1,107 मौलिक भक्तिगीतों की रचना करने के लिए आधिकारिक रूप से विश्व रिकॉर्ड से सम्मानित किया। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने अपना 9वां विश्व रिकॉर्ड स्थापित कर नया इतिहास रच दिया।

समारोह को संबोधित करते हुए पद्मश्री अनुप जलोटा ने कहा, “भगवान भैरव पर 1,107 मौलिक भक्तिगीतों की रचना करना केवल एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि असाधारण साधना, अटूट श्रद्धा और साहित्यिक समर्पण का प्रतीक है। मुझे विश्वास है कि ‘भक्ति का महासागर’ देश-विदेश के श्रद्धालुओं और संगीत प्रेमियों के लिए प्रेरणा एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत बनेगा।”

अपने अध्यक्षीय संबोधन में मेघराज राजे भोसले ने कहा, “विराग मधुमालती की यह ऐतिहासिक उपलब्धि सम्पूर्ण देश के लिए गर्व का विषय है।”

अशोक मेहरा ने कहा कि ऐसे रचनात्मक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रयासों को उनका सहयोग भविष्य में भी निरंतर मिलता रहेगा।

अपने उद्बोधन में विराग मधुमालती ने कहा, “‘भक्ति का महासागर’ मेरे लिए केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि भगवान भैरव के श्रीचरणों में समर्पित मेरी श्रद्धा, साधना और भक्ति का प्रसाद है। यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि उन सभी श्रद्धालुओं का है, जिनकी आस्था और आशीर्वाद ने मुझे इस दिव्य यात्रा को पूर्ण करने की शक्ति प्रदान की।”

भगवान भैरव को समर्पित 1,107 मौलिक भक्तिगीतों का यह संकलन, उसका भव्य लोकार्पण और वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बुक ऑफ इंडिया से मिला सम्मान विराग मधुमालती की साहित्यिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक साधना को नई पहचान देने के साथ ही भक्ति साहित्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया।

Pratahkal Newsroom

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