मुंबई के वर्सोवा में निर्माणाधीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का काम लगभग 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने परियोजना को 31 मार्च 2027 तक पूरा करने की समय सीमा तय की है। निर्धारित अवधि में काम पूरा नहीं होने पर संबंधित ठेकेदार कंपनी के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। बीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त अभिजित बांगर ने परियोजना स्थल का निरीक्षण कर निर्माण कार्य और तकनीकी व्यवस्थाओं की समीक्षा की।

वर्सोवा के खाड़ी क्षेत्र में लगभग 180 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) क्षमता वाले इस आधुनिक मलजल प्रक्रिया केंद्र का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना के शुरू होने से वर्सोवा, अंधेरी पूर्व, अंधेरी पश्चिम, जुहू और विलेपार्ले जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों के लाखों नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा। इस केंद्र में गंदे पानी के शोधन के लिए ‘सिक्वेंशियल बैच रिएक्टर’ (एसबीआर) जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे पानी में मौजूद हानिकारक तत्वों को दूर करने और पश्चिमी उपनगरों के समुद्री तटों की स्वच्छता में सुधार लाने में मदद मिलेगी।

निरीक्षण के दौरान अतिरिक्त आयुक्त अभिजित बांगर ने अधिकारियों को निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने परियोजना स्थल पर वर्तमान में काम कर रहे 340 मजदूरों की संख्या 31 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाकर 500 करने को कहा। साथ ही, काम को तीन पालियों में चौबीसों घंटे जारी रखने के निर्देश दिए, ताकि निर्धारित समय सीमा में परियोजना पूरी की जा सके।

बीएमसी ने प्राथमिक जल शोधन व्यवस्था को 31 दिसंबर 2026 तक चालू करने का लक्ष्य रखा है। इसके बाद परियोजना को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्य में तेजी लाने के साथ गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। 31 मार्च 2027 की समय सीमा के मद्देनजर अब मजदूरों की संख्या बढ़ाने और तीन पालियों में काम जारी रखने पर जोर दिया जा रहा है। समय पर परियोजना पूरी करना और निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करना बीएमसी के लिए प्रमुख लक्ष्य है।

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