वसई-विरार में 64 करोड़ का कचरा घोटाला, बाइक-कार से 27 टन कचरा ढुलाई का फर्जीवाड़ा
वसई-विरार के 64 करोड़ के कचरा घोटाले में एफआईआर, बाइक-कार से 27 टन कचरा ढुलाई के दावे ने जांच को चौंकाया है।

तस्वीर में वसई विरार शहर महानगरपालिका की मुख्य इमारत का बाहरी हिस्सा दिखाई दे रहा है।
वसई-विरार महानगरपालिका के ठोस कचरा प्रबंधन विभाग में 64 करोड़ रुपये के बायो-माइनिंग कचरा घोटाले को लेकर बड़ी कानूनी कार्रवाई हुई है। पुराने कचरे को प्रोसेस कर तैयार किए गए आरडीएफ यानी रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल को देश की बड़ी सीमेंट कंपनियों को भेजने के नाम पर फर्जी सर्टिफिकेट और झूठे कागजात जमा कर करीब 37 करोड़ 66 लाख रुपये के बिल पास करवाए गए।
इस मामले में बोबाली पुलिस स्टेशन में मेसर्स साई यूटिलिटी कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड के हिंदकुमार श्रीकांत यादव और सब-कॉन्ट्रैक्टिंग करने वाले अजहरुद्दीन बशीर सैयद के खिलाफ पुलिस केस दर्ज किया गया है। बीएमसी के सहायक आयुक्त जितेंद्र हरेश्वर नाइक द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, ठेकेदारों ने डालमिया और आदित्य बिड़ला अल्ट्राटेक जैसी नामी सीमेंट कंपनियों के नाम से फर्जी सर्टिफिकेट तैयार किए थे।
नगर निगम ने जब इन सर्टिफिकेट और दस्तावेजों की पुष्टि खुद सीमेंट कंपनियों से कराई, तब कथित फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। इसके बाद मामले में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।
घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू आरडीएफ कचरे की ढुलाई में इस्तेमाल दिखाए गए वाहनों से जुड़ा है। ठेकेदारों ने दस्तावेजों में होंडा यूनिकॉन मोटरसाइकिल, मारुति स्विफ्ट डिजायर कार, टाटा इंडिका और पावर टिलर जैसी गाड़ियों से 26 से 27 टन कचरा ढोया जाना दर्शाया। दोपहिया वाहन और कार से इतना वजन ढोने का दावा सामने आने के बाद कागजी रिकॉर्ड पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
विरोधी पक्ष नेता मनोज पाटील ने इस मुद्दे को सबूतों के साथ उठाया था। इसके बाद नगर निगम आयुक्त पृथ्वीराज बी. पी. के निर्देश पर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
फिलहाल पुलिस मामले में ई-वे बिल, टोल रिकॉर्ड्स और बैंक खातों की जांच कर रही है। जांच के जरिए आरडीएफ की ढुलाई, प्रस्तुत दस्तावेजों और करीब 37 करोड़ 66 लाख रुपये के पास किए गए बिलों से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है।

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