वसई पूर्व के वालीव पुलिस स्टेशन क्षेत्र के नाइकपाड़ा स्थित डायमंड इंडस्ट्रियल इलाके में एक प्रवासी कारोबारी पर हुई फायरिंग की सनसनीखेज वारदात का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। जांच में सामने आया कि करोड़ों रुपये के कर्ज से छुटकारा पाने और कंपनी पर कब्जा करने के मकसद से कारोबारी के ही पार्टनर ने उसकी हत्या की साजिश रची थी। इस मामले में वालीव पुलिस की डिटेक्शन ब्रांच ने मुंबई, गुजरात, वसई और उत्तर प्रदेश से कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

घटना में जी, एस, एम फोइल पेपर कंपनी के मालिक 43 वर्षीय मोहनसिंह लक्ष्मण सिंह परमार, निवासी गांवगुड़ा, तहसील खमनोर, जिला राजसमंद (राजस्थान), पर दो अज्ञात नकाबपोश बदमाशों ने गोली चलाकर हत्या का प्रयास किया था। गोली उनके सीने में फंस गई, जिससे उनकी जान बच गई। उपचार के बाद उनकी हालत अब सामान्य बताई गई है। इस घटना के बाद औद्योगिक क्षेत्र के कारोबारियों में दहशत फैल गई थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त निकेत कौशिक, अपर आयुक्त संजय शित्रे और डीसीपी अशोक विरकर के मार्गदर्शन में वालीव पुलिस स्टेशन के पीआई दिलीप घुगे के नेतृत्व में एपीआई सोपान पाटील और उनकी टीम ने जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले तथा घायल कारोबारी मोहनसिंह के बयान के आधार पर एक संदिग्ध की पहचान की। मोहनसिंह के मोबाइल से मिले एक नंबर के आधार पर संदिग्ध को हिरासत में लिया गया, जिसकी पहचान कंपनी के पार्टनर सागर गिरीश भानुशाली के रूप में हुई।

सागर गिरीश भानुशाली की गिरफ्तारी के बाद साइबर सेल और तकनीकी विश्लेषण की मदद से पुलिस ने अन्य पांच आरोपियों को उत्तर प्रदेश, मुंबई, गुजरात और वसई से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब वारदात में इस्तेमाल की गई पिस्तौल, बाइक और अन्य साक्ष्यों की बरामदगी के लिए आरोपियों से पूछताछ कर रही है।

जांच में सामने आया कि सागर गिरीश भानुशाली वर्ष 2019 में जी, एस, एम फोइल पेपर कंपनी में कर्मचारी के रूप में जुड़ा था। चार्टर्ड अकाउंटेंट होने के कारण वह कंपनी के व्यवसाय को बढ़ाने, अधिक मुनाफा दिलाने और विस्तार की रणनीति बनाने में माहिर था। कुछ ही वर्षों में उसने कंपनी को शीर्ष स्तर तक पहुंचाने में भूमिका निभाई और वर्ष 2024 में वह कंपनी का पार्टनर बन गया।

पुलिस के अनुसार पार्टनर बनने के बाद भानुशाली ने कंपनी के शेयर तथा लोगों से लिए गए करोड़ों रुपये शेयर मार्केट में निवेश कर दिए। शेयर बाजार में गिरावट आने से उसे 55 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और कर्जदाता पैसे वापस मांगने लगे। इस दौरान मोहनसिंह ने उसे कर्ज से उबारने के लिए 32 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद भी की।

इसके बावजूद भानुशाली ने कथित रूप से अपने पार्टनर की हत्या की योजना बनाई। पुलिस के अनुसार उसने विजयकुमार प्रजापत विश्वकर्मा से संपर्क किया, जिसने पूरी साजिश का समन्वय किया। हत्या के लिए 35 से 40 लाख रुपये की सुपारी तय की गई। हथियार, वाहन और शूटर की व्यवस्था करने के लिए विजयकुमार को 10 लाख रुपये अग्रिम दिए गए, जबकि शेष रकम वारदात के बाद देने की बात तय हुई। पुलिस के अनुसार साजिश का मकसद मोहनसिंह की हत्या के बाद 32 करोड़ रुपये वापस नहीं करना और कंपनी पर कब्जा करना था।

जांच में यह भी सामने आया कि विजयकुमार ने पहले एक व्यक्ति को उत्तर प्रदेश हथियार लेने भेजा, लेकिन वह पैसे लेकर फरार हो गया। इसके बाद वह स्वयं उत्तर प्रदेश गया और वहां 25 हजार रुपये के इनामी शूटर सुजीत देवेंद्रभाई पांडे से हत्या की डील तय की। पुलिस के अनुसार शूटर सुजीत पांडे को गोकुल ओमप्रकाश गौतम ने मनोज मूलचंद ठठेरा के माध्यम से हथियार उपलब्ध कराया। तीनों उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के रहने वाले हैं और आपराधिक मामलों में लिप्त रहे हैं।

वारदात को अंजाम देने से पहले अनूप वीरेंद्र प्रजापति को भी साजिश में शामिल किया गया, जिसने घटनास्थल की रेकी की और इलाके की जानकारी शूटर तक पहुंचाई। इसके बाद पूरी योजना के तहत हत्या की तैयारी की गई।

24 जुलाई 2026 की शाम अनूप प्रजापति बाइक पर शूटर सुजीत पांडे को बैठाकर कंपनी के पास पहुंचा। रात करीब 8 बजे मोहनसिंह कंपनी से बाहर निकलकर अपनी कार की ओर बढ़े। तभी पहले से घात लगाए बैठे शूटर सुजीत ने उन्हें आवाज दी। जैसे ही मोहनसिंह मुड़े, शूटर ने बेहद करीब से उनके सीने पर गोली चला दी। दूसरी गोली चलाने के दौरान ट्रिगर फंस गया, जिससे फायर नहीं हो सका। इसके बाद शूटर ने पिस्तौल की बट से उनके सिर पर कई वार कर जान से मारने की कोशिश की। गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचने लगे, जिसके बाद दोनों आरोपी वहां से फरार हो गए।

पुलिस जांच में सामने आया कि सुपारी तय होने के बाद उत्तर प्रदेश के दोनों आरोपियों और बाइक चालक ने अपने-अपने मोबाइल फोन बंद कर घर पर ही छोड़ दिए थे, ताकि पुलिस उन्हें ट्रेस न कर सके। वारदात के बाद दोनों आरोपी कामन तक पहुंचे, वहां बाइक छोड़ दी और अलग-अलग दिशाओं में फरार हो गए।

हालांकि मोहनसिंह के मोबाइल से मिले ऑनलाइन चैट रिकॉर्ड और कंपनी के अकाउंट ट्रांजैक्शन की जांच से पूरी साजिश का खुलासा हो गया। उत्तर प्रदेश एसटीएफ की सहायता, तकनीकी विश्लेषण, सीडीआर, आईपीडीआर और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर वालीव पुलिस ने पूरे मामले का पर्दाफाश करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य शूटर सुजीत देवेंद्रभाई पांडे (38), निवासी पूरा फरदाहा, बेल्थरा, जिला बलिया (उत्तर प्रदेश), तथा मनोज मूलचंद ठठेरा, निवासी देवगांव लालगंज, जिला आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) शामिल हैं। अन्य आरोपियों को गुजरात, मुंबई और वसई से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने इस पूरे षड्यंत्र के मुख्य आरोपी और साजिशकर्ता सागर गिरीश भानुशाली को वसई से गिरफ्तार किया है। मामले की आगे की जांच जारी है और पुलिस वारदात में इस्तेमाल हथियार व अन्य साक्ष्यों की बरामदगी के प्रयास कर रही है।

Pratahkal Bureau

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