महाराष्ट्र में चुनावी माहौल के बीच राजनीतिक आरोप–प्रत्यारोप का दौर और तीखा हो गया है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने शनिवार को महायुति गठबंधन पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे नेता किसानों की तकलीफों से मुंह मोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उन्हें वोट देकर सत्ता सौंपी, आज वही किसान परेशान हैं, लेकिन सरकार के नेता उनकी पीड़ा सुनने तक नहीं पहुंच रहे।

उद्धव ठाकरे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से किसानों से मिलने उनके बीच गए और उनकी समस्याएं सुनीं। मगर महायुति के नेता जनता से दूरी बनाए हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसान संकट में हैं, तब उनके प्रतिनिधि मैदान में उतरने से क्यों डर रहे हैं। उद्धव ने कहा कि गठबंधन के भीतर आरोपों की राजनीति तो खूब हो रही है, पर जिम्मेदारी लेने और कार्रवाई करने की हिम्मत किसी में नहीं है।

महायुति नेता रविंद्र चौहान के उस बयान पर भी उद्धव ने तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसमें दावा किया गया था कि ‘युति 2 दिसंबर तक रहेगी।’ ठाकरे ने इसे बीजेपी की ‘यूज एंड थ्रो’ नीति का उदाहरण बताया और कहा कि यह गठबंधन कितनी दूर फेंकेगा, यह कोई नहीं जानता। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी का हिंदुत्व और देशभक्ति दोनों ही खोखले हैं।

उद्धव ठाकरे ने संसद की हालिया अधिसूचना पर भी गंभीर सवाल उठाए, जिसमें कथित रूप से संसद के भीतर ‘वंदे मातरम’ कहने पर रोक की बात की गई है। उन्होंने पूछा कि ऐसी अधिसूचना किसके दिमाग की उपज है, जबकि एक समय बीजेपी के नेता ही ‘वंदे मातरम’ का मुद्दा सबसे अधिक उठाते थे। ठाकरे ने स्पष्ट कहा कि उनके सांसद संसद में जाकर ‘वंदे मातरम’ कहेंगे और यदि बीजेपी में हिम्मत है तो उन्हें बाहर निकालकर दिखाए। उन्होंने यह भी मांग की कि जिस अधिकारी ने यह अधिसूचना जारी की है, उसे चिन्हित कर कार्रवाई की जाए।

उद्धव के इन बयानों ने प्रदेश की राजनीति को एक बार फिर गर्मा दिया है। किसान मुद्दों की अनदेखी और संसद से जुड़ी इस नई बहस ने आगामी चुनाव को लेकर माहौल और भी तनावपूर्ण कर दिया है। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि यह तकरार आने वाले दिनों में और तीखी हो सकती है।

Pratahkal Bureau

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