मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत में हलचल मचाने वाले शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के चुनाव चिन्ह विवाद पर अब फैसला अगले साल होगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई के लिए 21 जनवरी 2026 की तारीख निर्धारित की है। इसका अर्थ यह है कि राज्य में प्रस्तावित स्थानीय निकाय चुनाव समाप्त होने के बाद ही इस विवाद पर कोई निर्णायक फैसला आ पाएगा। इससे उद्धव ठाकरे और शरद पवार खेमे की उम्मीदों को फिलहाल एक और झटका लगा है, क्योंकि निकाय चुनावों को दोनों गुटों के लिए राजनीतिक पुनर्स्थापना का बड़ा अवसर माना जा रहा था।

मामला 12 नवंबर को सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई के लिए आया था, जिसके बाद न्यायालय ने अगली सुनवाई की तिथि 21 जनवरी तय की। उस दिन शिवसेना से जुड़ा मामला पहले सुना जाएगा और इसके बाद एनसीपी विवाद पर बहस होगी। दोनों पक्षों को अपनी दलीलें रखने के लिए दो-दो घंटे का समय दिया गया है। सुनवाई सुबह 11:30 बजे आरंभ होगी।

केंद्रीय चुनाव आयोग ने वर्ष 2023 में फैसला सुनाते हुए शिवसेना को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली पार्टी माना था और ‘धनुष-बाण’ चिन्ह का अधिकार भी उन्हें दिया था। इसी तरह, एनसीपी के मामले में आयोग ने पार्टी का नियंत्रण अजित पवार गुट को सौंप दिया था। आयोग के इन निर्णयों को उद्धव ठाकरे और शरद पवार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। तभी से दोनों मामले न्यायालय में लंबित हैं।

अब जब अदालत ने नई तारीख 21 जनवरी 2026 तय की है, तब तक महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव संपन्न हो चुके होंगे। सुप्रीम कोर्ट पहले ही राज्य सरकार को आदेश दे चुका है कि सभी स्थानीय निकाय चुनाव 26 जनवरी 2026 तक पूर्ण कराए जाएं। 2 दिसंबर को नगर पालिका और नगर पंचायत चुनावों की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसके बाद जिला परिषद, पंचायत समिति और नगर निगमों के चुनाव कराए जाने की संभावना है।

शिवसेना और एनसीपी के पार्टी चिन्ह विवाद पर चल रही यह याचिका तीन वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। शिवसेना का ‘धनुष-बाण’ चिन्ह और एनसीपी का ‘घड़ी’ प्रतीक, दोनों ही महाराष्ट्र की राजनीति में गहरी पहचान रखते हैं। इन प्रतीकों पर अधिकार को लेकर छिड़ा यह संघर्ष न केवल राजनीतिक दलों की पहचान का सवाल है, बल्कि आने वाले चुनावी समीकरणों पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा।

अब जबकि मामला अगले साल तक खिंच गया है, महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर अनिश्चितता की परतें गहराती दिख रही हैं। सभी की निगाहें अब 21 जनवरी 2026 पर टिकी हैं — जिस दिन यह तय होगा कि “असली शिवसेना” और “असली एनसीपी” आखिर किसके पास होगी।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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