ठाणे तेरापंथ भवन में 'नवोन्मेष' उपासक कार्यशाला का आयोजन
मुनि कुलदीप और मुकुल कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला में मुंबई और ठाणे क्षेत्र के विशिष्ट उपासकों ने आध्यात्मिक साधना और स्वाध्याय पर विचार रखे।

ठाणे तेरापंथ भवन में आयोजित 'नवोन्मेष' कार्यशाला के दौरान मंच पर विराजमान जैन मुनि मुकुल कुमार और मुनि कुलदीप कुमार।
मुंबई के ठाणे स्थित तेरापंथ भवन में श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, मुंबई के तत्वावधान में बृहद मुंबई उपासक कार्यशाला ‘नवोन्मेष’ का सफल आयोजन किया गया। मुनि कुलदीप कुमार एवं मुनि मुकुल कुमार के निर्देशन में आयोजित इस कार्यशाला का आयोजन श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा, ठाणे द्वारा किया गया। इसमें मुंबई के विभिन्न उपनगरों से विशिष्ट उपासकों और उपासिकाओं ने भाग लेकर आध्यात्मिक साधना, स्वाध्याय और उपासक श्रेणी को प्रभावी बनाने से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार प्रस्तुत किए।
मुनि कुलदीप कुमार ने उपासकों को पर्युषण यात्रा को सफल बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने सभी उपासक परिवारों को नियमित रूप से गहन स्वाध्याय करने की प्रेरणा दी। उन्होंने उपासक श्रेणी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उपासक चारित्रात्माओं और श्रावक समाज के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। वे स्वयं साधना करते हैं और दूसरों की साधना में भी सहयोगी बनते हैं। यह श्रेणी समाज की अमूल्य धरोहर है। इसलिए सभी उपासकों को अपनी गुणवत्ता बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
मुनि मुकुल कुमार ने अपने सारगर्भित प्रेरणा पाथेय में उपासकों को आंतरिक और बाह्य व्यक्तित्व में और अधिक परिष्कार करने की प्रेरणा दी। उन्होंने फरमाया कि चारित्रात्माओं के अस्वस्थ होने या अनुपस्थित रहने की स्थिति में उपासक श्रेणी के सदस्य श्रावक समाज की आध्यात्मिक सार-संभाल करने और प्रवचन देने का कार्य अच्छी तरह कर सकते हैं। इसके लिए उपासकों को अपनी गुणवत्ता का स्वयं आकलन करना चाहिए और नियमित अभ्यास जारी रखना चाहिए।
कार्यशाला में मुंबई सभा के अध्यक्ष सुरेन्द्र कोठारी भी उपस्थित रहे। उन्होंने उपासकों को प्रोत्साहित किया और ठाणे सभा द्वारा आयोजित इस कार्यशाला की सराहना की। ठाणे सभाध्यक्ष नरेश बाफना ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया। इस अवसर पर ठाणे की उपासक बहनों ने ‘उपासक गीत’ के माध्यम से मंगलाचरण किया।
मुंबई उपासक श्रेणी के संयोजक राजेन्द्र मुनोत ने श्रावक समाज के सम्मुख नए उपासक बनने की विधि-विधान संबंधी जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने आह्वान किया कि जो लोग उपासक बनने की इच्छा और अर्हता रखते हैं, वे इस श्रेणी से जुड़कर अपने आत्मकल्याण की भूमिका सुनिश्चित करें।
कार्यशाला में मुंबई और ठाणे क्षेत्र के अनेक उपासकों ने विभिन्न विषयों पर सारगर्भित प्रस्तुतियां दीं। डॉ. सुन्दर इन्टोदिया ने ‘शुद्ध सामायिक कैसे करें’ विषय पर, कुमुद कच्छारा ने ‘उपासक श्रेणी को प्रभावी बनाएं’ विषय पर और प्रतिभा चोपड़ा ने ‘जैन धर्म का परिचय’ विषय पर अपनी प्रस्तुति दी। वहीं, सुभाष चपलोत ने ‘आधुनिक युग में भगवान महावीर’, चन्द्र प्रकाश मेहता ने ‘तेरापंथ का गौरवशाली इतिहास’ तथा लाड़ कोठारी ने ‘युवापीढ़ी को संघ से कैसे जोड़ें’ विषय पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में मुंबई सभा के मंत्री गौतम डांगी, कोषाध्यक्ष रिंकू बाफना और वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिनेश सुतरिया की गरिमामय उपस्थिति रही। कार्यशाला में पधारे सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, उपासकों और समस्त श्रावक समाज के प्रति ठाणे सभा के मंत्री राजेश बापना ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन उपासक अशोक इन्टोदिया ने किया।
इस महत्वपूर्ण कार्यशाला को सफल बनाने में ठाणे सभा के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और ठाणे उपासक श्रेणी के सभी उपासकों का सराहनीय योगदान रहा। आयोजन में विशेष रूप से नवरतन गोखरु, विनोद कोठारी, अशोक नवलखा, कमलेश दुगड़, कमलेश चंडालिया, नवरतन दुगड़, राहुल ओस्तवाल और श्रेयांस धारीवाल सहित समाज के गणमान्य कार्यकर्ताओं ने सहयोग दिया। कार्यशाला के माध्यम से उपासक श्रेणी की साधना, स्वाध्याय, व्यक्तित्व परिष्कार और श्रावक समाज के बीच आध्यात्मिक मार्गदर्शन की भूमिका को प्रमुखता से सामने रखा गया।

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