बीएमसी चुनाव से पहले महाविकास अघाड़ी में बढ़ी खींचतान, कांग्रेस को मनाने में जुटे उद्धव ठाकरे
बीएमसी चुनाव से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में महाविकास अघाड़ी के भीतर बढ़ती खींचतान तेज हो गई है। कांग्रेस की नाराजगी दूर करने में जुटे उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की भूमिका पर नए समीकरण बन रहे हैं। शरद पवार की सक्रियता के बीच गठबंधन की संभावनाएं और उद्धव के प्लान-बी ने सियासी माहौल को गर्मा दिया है।

मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में बीएमसी चुनाव से पहले नए समीकरणों और बदलते गठबंधनों ने हलचल मचा दी है। महाविकास अघाड़ी के भीतर इन दिनों सबकुछ सहज नहीं दिख रहा। कांग्रेस पार्टी, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की बढ़ती नजदीकियों से असहज महसूस कर रही है। इसी नाराजगी को दूर करने के लिए उद्धव ठाकरे लगातार कांग्रेस नेतृत्व को मनाने की कोशिश में जुटे हुए हैं, जबकि दूसरी ओर नया राजनीतिक गठबंधन बनने की संभावनाएं भी तेजी से सर उठा रही हैं। राज्य की सबसे बड़ी नगर निकाय बीएमसी के चुनावों को लेकर चल रही यह उठापटक अब एक नए राजनीतिक मोड़ की ओर बढ़ती दिख रही है।
शिवसेना (यूबीटी) के सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि वह बीएमसी चुनाव अकेले दम पर लड़ना चाहती है। इसके बावजूद उद्धव ठाकरे दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के संपर्क में हैं और महाविकास अघाड़ी को बचाए रखने के लिए जोर लगा रहे हैं। कांग्रेस ने साफ संदेश दिया है कि यदि राज ठाकरे महाविकास अघाड़ी का हिस्सा बने, तो वह इस गठबंधन में शामिल नहीं होगी। कांग्रेस की नाराजगी के बीच उद्धव ठाकरे ने तर्क दिया है कि महायुति के खिलाफ अलग-अलग चुनाव लड़ने से विपक्ष को ही नुकसान होगा और भाजपा को हराने के लिए संयुक्त मोर्चा बनाना बेहद जरूरी है।
वहीं दूसरी ओर एनसीपी (एसपी) के सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस बीएमसी चुनाव एनसीपी (एसपी) के साथ मिलकर लड़ने के पक्ष में है। हालांकि शरद पवार का रुख इससे अलग है। वह चाहते हैं कि चुनाव महाविकास अघाड़ी की एकजुटता के साथ लड़ा जाए, जिसमें उद्धव ठाकरे भी शामिल हों। इसी मुद्दे को सुलझाने के लिए अगले सप्ताह कांग्रेस और एनसीपी (एसपी) के बीच अहम बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक से पहले शरद पवार खुद महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से बात कर चुके हैं।
अगर कांग्रेस अपनी स्थिति पर अडिग रहती है और राज ठाकरे को गठबंधन में शामिल करने से इनकार करती है, तो उद्धव ठाकरे ने भी अपना प्लान-बी तैयार कर रखा है। इस योजना के तहत उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे और शरद पवार महायुति के खिलाफ एक नए मोर्चे के रूप में चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। बीएमसी चुनाव से पहले बन रही इस नई राजनीतिक पटकथा ने राज्य के सियासी तापमान को और बढ़ा दिया है, जहां हर बैठक और हर बयान नई दिशा तय करने की क्षमता रखता है।
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Pratahkal Bureau
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