झोपड़पट्टी मुक्त मुंबई पर सुरेशचंद्र राजहंस का हमला, महायुति सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप
मुंबई कांग्रेस प्रवक्ता सुरेशचंद्र राजहंस ने कहा कि नगर विकास विभाग की नीतियों और एसआरए योजना की विफलता से गरीबों को शहर से बाहर धकेला जा रहा है।

मुंबई को वैश्विक स्तर का शहर बनाने और उसे शंघाई तथा सिंगापुर जैसी आधुनिक महानगरी में बदलने के बड़े-बड़े दावों के बीच ‘झोपड़पट्टी मुक्त मुंबई’ का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में आ गया है। मुंबई कांग्रेस के प्रवक्ता एवं मीडिया समन्वयक सुरेशचंद्र राजहंस ने भारतीय जनता पार्टी और महायुति सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि भ्रष्टाचार और गलत नीतियों ने मुंबई के विकास को पूरी तरह ठप कर दिया है।
राजहंस ने कहा कि मुंबई को विश्वस्तरीय शहर बनाने का सपना दिखाने वाली सरकार ने वास्तव में शहर के मेहनतकश मजदूरों और गरीब वर्ग के साथ धोखाधड़ी की है। उनके अनुसार, राज्य सरकार का नगर विकास विभाग भ्रष्टाचार का केंद्र बन चुका है, जहां नीतियां आम जनता की जरूरतों के आधार पर नहीं, बल्कि कमीशन और ‘प्रतिशत’ की राजनीति के आधार पर तय की जा रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा-महायुति सरकार केवल अपने चहेते पूंजीपतियों और बिल्डरों को लाभ पहुंचाने में लगी हुई है। झोपड़पट्टी पुनर्वसन योजना पूरी तरह बिल्डर-परस्त बन गई है, जिसमें बिल्डर, सरकारी अधिकारी और सत्ताधारी नेताओं की ‘अभद्र युति’ मुंबई के कीमती भूखंडों पर कब्जा करने के लिए संगठित रूप से काम कर रही है।
राजहंस ने कहा कि एक ओर गरीबों को पक्का घर देने के प्रति सरकार उदासीन बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर झोपड़ियों की जगह ऊंचे-ऊंचे टॉवर खड़े कर मूल निवासियों को शहर की सीमाओं से बाहर धकेला जा रहा है। उन्होंने इसे विकास के नाम पर गरीबों के विस्थापन की सुनियोजित प्रक्रिया बताया।
मुंबई कांग्रेस प्रवक्ता ने मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा सरकार को लगाई गई फटकार का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राज्य सरकार की विफलताओं पर एक बड़ी चपराक है। उन्होंने कहा कि वर्षों से स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (एसआरए) योजना लागू होने के बावजूद मुंबई में झोपड़पट्टियों की संख्या घटने के बजाय लगातार बढ़ रही है।
राजहंस ने तंज कसते हुए कहा कि यह सरकार ‘गैंडे की खाल’ वाली है, जिसे न तो न्यायालय के निर्देशों की चिंता है और न ही आम जनता की पीड़ा की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा-महायुति सरकार चुनाव के दौरान केवल वोट बैंक की राजनीति के लिए झूठे वादे करती है, जबकि वास्तविकता में उसकी नीतियां बड़े उद्योगपतियों और बिल्डरों के हितों की रक्षा तक सीमित हैं।
उन्होंने कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो ‘झोपड़पट्टी मुक्त मुंबई’ का सपना केवल राजनीतिक नारों तक सिमट कर रह जाएगा और शहर का गरीब तथा मेहनतकश वर्ग अपने ही शहर में हाशिए पर धकेल दिया जाएगा।

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