चांदी की तेजी रुकने का नाम नहीं ले रही, 2026 की पहली तिमाही में 20% तक उछाल की संभावना
वर्ष 2025 में चांदी की रिकॉर्ड तोड़ तेजी थमने का नाम नहीं ले रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 67 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंची चांदी, भौतिक आपूर्ति की कमी और ETF निवेश के दबाव से 2026 की पहली तिमाही में 20% तक और उछाल की संभावना जताई जा रही है।

मुंबई। वर्ष 2025 की अब तक की सबसे शानदार संपत्ति प्रदर्शन में चांदी की रिकॉर्ड तोड़ तेजी थमने का नाम नहीं ले रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को चांदी 67 डॉलर प्रति औंस के नए सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई, जबकि इस वर्ष इसकी कीमतें दोगुने से अधिक बढ़ चुकी हैं। निवेशकों की मजबूत मांग और भौतिक आपूर्ति में कमी के चलते विशेषज्ञ मानते हैं कि चांदी के दाम आने वाले समय में और ऊंचे स्तर छू सकते हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में चांदी में करीब 20% तक तेजी की संभावना है। उनका अनुमान है कि मार्च तक चांदी की कीमतें 70 से 80 डॉलर प्रति औंस के दायरे में पहुंच सकती हैं। इस स्तर पर निवेशकों के लिए “डिप्स पर खरीद” की रणनीति को अपनाना लाभदायक हो सकता है। वर्ष 2025 में चांदी की कीमतें 127.5% से अधिक बढ़ चुकी हैं।
एमके ग्लोबल की रिसर्च एनालिस्ट रिया सिंह के अनुसार, लंदन और चीन में भौतिक आपूर्ति की कमी, अमेरिका में बढ़ते निर्यात और कॉमेक्स प्रीमियम के कारण बाजार में असंतुलन उत्पन्न हुआ है। इसके अतिरिक्त, भौतिक चांदी से समर्थित ईटीएफ (ETF) में वैश्विक निवेश बढ़ने से आपूर्ति संकट और गहरा गया है। जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च उपाध्यक्ष प्रणव मेर का कहना है कि रिटेल और एचएनआई निवेशकों की मजबूत हिस्सेदारी अब लगभग दो वर्षों की वैश्विक खपत मांग से समर्थित है।
सोने की रिकॉर्ड तेजी के बाद चांदी में यह उछाल आया है। महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता के दबाव ने कीमती धातुओं की मांग को बढ़ावा दिया है। चांदी की लोकप्रियता केवल मूल्य संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका औद्योगिक उपयोग भी लगातार बढ़ रहा है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी तकनीकों में चांदी की मांग में निरंतर वृद्धि हो रही है, जो कीमतों को मजबूती प्रदान कर रही है।
कोटक सिक्योरिटीज की कायनात चैनवाला के अनुसार, चीन द्वारा 2026 से चांदी के निर्यात पर संभावित प्रतिबंध वैश्विक आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है और बाजार को और कड़ा बना सकता है। वहीं, आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स के नवीन माथुर का कहना है कि आपूर्ति घाटा 2026-27 तक बना रह सकता है, हालांकि 2025 की तुलना में तेजी कुछ सीमित हो सकती है। इसके बावजूद, विश्लेषकों का मानना है कि 2026 की पहली तिमाही में चांदी का प्रदर्शन सोने से बेहतर रह सकता है।
विशेषज्ञ निवेशकों को मौजूदा स्तरों पर सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। वर्षांत क्लोजर और क्रिसमस अवकाश के चलते प्रमुख बाजारों में कारोबार का वॉल्यूम कम रहने की संभावना है। साथ ही, अमेरिका में मंदी के संकेत या AI आधारित बाजार में संभावित बुलबुला कीमतों में अचानक गिरावट ला सकता है।
चांदी की यह तेजी न केवल निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर प्रस्तुत करती है, बल्कि वैश्विक आपूर्ति और औद्योगिक मांग के संतुलन को भी प्रभावित कर रही है, जिससे आने वाले वर्षों में इस धातु की भूमिका और महत्व बढ़ने की उम्मीद है।
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