मुंबई: इस त्योहारी सीजन में चांदी ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है। शुक्रवार को मुंबई में इसका भाव 1,32,000 रु./किलो यानी 132 रु./ग्राम दर्ज हुआ। यह पहली बार है जब चांदी 1.32 लाख रु./किलो के पार पहुंची है।

पिछले दो दशकों पर नज़र डालें तो 2005 में चांदी 10,675 रु./किलो थी। 2015 में यह 37,825 रु./किलो और 2021 में महामारी के दौरान 62,862 रु./किलो तक पहुंच गई थी। मार्च 2025 के अंत तक कीमत 1,03,900 रु./किलो थी, जो अब बढ़कर नई ऊंचाई पर पहुंच गई है।

छोटे सिक्कों की डिमांड तेजी से बढ़ती कीमतों ने उपहार स्वरूप दिए जाने वाले सिक्कों का आकार छोटा कर दिया है। पहले जहां लोग 50 और 100 ग्राम के सिक्के खरीदते थे, वहीं अब मांग 5 और 10 ग्राम तक सीमित हो गई है।

मुलुंड के जूलर रमेश जैन के अनुसार, ग्राहक बजट में फिट बैठने वाले हल्के सिक्के पसंद कर रहे हैं।

"हमने ऐसे सिक्के तैयार किए हैं जो दिखने में 10 ग्राम के लगते हैं लेकिन असल में 5 ग्राम के होते हैं।"

मालाड के लक्ष्मी जूलर्स के मालिक लक्ष्मीकांत कोठारी ने बताया,

"चांदी महंगी होने से ‘शगुन’ के सिक्कों का आकार छोटा हो गया है। नवरात्रि और दिवाली पर भी यही ट्रेंड जारी रहेगा।"

दाम बढ़ने के कारण ऑल इंडिया बुलियन एंड जूलर्स एसोसिएशन (AIBJA) के चेयरमैन योगेश सिंघल का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, इलेक्ट्रिक वाहनों और सोलर इंडस्ट्री की बढ़ती खपत और डॉलर पर निर्भरता घटाने की कोशिशें चांदी की कीमतों को ऊपर ले जा रही हैं। त्योहारों पर असर फिलहाल पितृपक्ष के चलते बाजार में सुस्ती है, लेकिन जूलर्स को उम्मीद है कि नवरात्रि और दिवाली पर खरीदारी बढ़ेगी। हालांकि इस बार उपहार में दिए जाने वाले सिक्कों का आकार पहले से छोटा ही रहेगा।

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Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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