मुंबई। गोरेगांव स्थित संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान की सीमा में रहने वाले हजारों नागरिकों के लंबे समय से लंबित पुनर्वासन का रास्ता साफ हो गया है। सरकार और बीएमसी अधिकारियों के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक में पहले चरण में उद्यान की सीमा से लगे लगभग 4 हजार निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने का फैसला लिया गया है। इसके बाद अगले चरणों में बाकी बचे 16 हजार नागरिकों का पुनर्वासन किया जाएगा।

दरअसल, कल्याण और पनवेल में घर दिए जाने के प्रस्ताव को लेकर स्थानीय निवासियों और सरकार के बीच विवाद चल रहा था। स्थानीय लोग इतनी दूर जाने के लिए तैयार नहीं थे। वहीं, हाई कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए राष्ट्रीय उद्यान की सुरक्षा के लिए उसकी सीमा पर दीवार बनाना जरूरी है। इसी के चलते पहले चरण में 4 हजार लोगों को हटाकर उनका पुनर्वासन करने की योजना बनाई गई है।

सरकार ने बीएमसी, म्हाडा और एसआरए को निर्देश दिए हैं कि आसपास के इलाकों में उपलब्ध घरों की तलाश की जाए, ताकि पुनर्वासन के बाद लोगों को ज्यादा दूर न जाना पड़े। इस फैसले के तहत पुनर्वासन की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी है।

योजना की अहम बात यह है कि राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में रहने वाले लगभग 2 हजार स्थानीय आदिवासियों को बाहर नहीं भेजा जाएगा। उन्हें उद्यान की सीमा के भीतर ही उनके रीति-रिवाजों के अनुसार एक मंजिला घर बनाकर बसाया जाएगा।

पुनर्वासन पूरा होने तक प्रभावित लोगों को बीएमसी की ओर से मोबाइल शौचालय और बिजली की अस्थायी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं, गणेश उत्सव को देखते हुए बीएमसी सड़कों की मरम्मत भी कराएगी। इस फैसले से राष्ट्रीय उद्यान की सुरक्षा के साथ यहां रह रहे हजारों नागरिकों के पुनर्वासन की लंबे समय से अटकी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल गया है।

Pratahkal Bureau

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