मुंबई में युगप्रधान आचार्य महाश्रमण की विदुषी सुशिष्या साध्वी निर्वाणश्री के पावन सान्निध्य में शरद पूर्णिमा के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें श्रद्धालुओं को शरद पूर्णिमा के महत्व, चंद्रमा के ध्यान और अर्हं न्यास के प्रयोग के बारे में बताया गया। साध्वी निर्वाणश्री ने कहा कि बारह पूर्णिमाओं में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है। चंद्रमा की ज्योतिर्मय और शीतल किरणें आधि-व्याधि का नाश करने वाली हैं। उन्होंने कहा कि अर्हं के श्वेत रंग में न्यास विशेष भाग्यदायी हो सकता है।

कार्यक्रम में साध्वी निर्वाणश्री ने तेरापंथ परंपरा की हाजरी का वाचन और विश्लेषण किया। इसके बाद लेखपत्र का सामूहिक स्वर में उच्चारण किया गया। तत्पश्चात श्रद्धालुओं को अर्हं न्यास का विशेष प्रयोग करवाया गया।



साध्वी डॉ. योगक्षेमप्रज्ञा ने पांडव चरित्र का सरस और प्रेरक आख्यान सुनाया, जिससे उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो गए। उन्होंने शरद पूर्णिमा के स्वास्थ्य और मन से संबंध की व्याख्या करते हुए कहा कि इस दिन का चंद्रमा धरती के सर्वाधिक निकट रहता है। इसकी शीतल किरणों में औषधीय गुण होते हैं। उन्होंने बताया कि चंद्रमा का ध्यान करके विशेष लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

मुख्य प्रवचन से पहले साध्वी लावण्यप्रभा ने समता की महिमा प्रतिपादित की और सामायिक के संदर्भ में चर्चा की। उन्होंने समता के महत्व पर विचार प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम में सभाध्यक्ष लक्ष्मण कोठारी ने जैन अल्पसंख्यक आयोग से जुड़े विकास आच्छा का स्वागत किया और आगामी कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसके बाद विकास आच्छा ने अपने विचार व्यक्त किए। शरद पूर्णिमा पर आयोजित इस कार्यक्रम में चंद्रमा के ध्यान, अर्हं न्यास, समता और सामायिक के महत्व पर चर्चा की गई।

Next Story