तेज बारिश और हवाओं के बीच घाटकोपर के संत मुक्ताबाई अस्पताल के बाहर एक मां अपनी नवजात बच्ची को गोद में लिए काफी देर से परेशान खड़ी थी। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उसे बच्ची के साथ घर लौटना था, लेकिन एक घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद परिवार को कोई ऑटो-रिक्शा नहीं मिल पा रहा था।

इसी दौरान अस्पताल का निरीक्षण दौरा पूरा करके बाहर निकल रहीं मुंबई की महापौर रितू तावड़े ने नवजात बच्ची के रोने की आवाज सुनी। मां की आंखों में चिंता देखकर महापौर रितू तावड़े तुरंत उनके पास पहुंचीं और परेशानी के बारे में पूछा।

पूरी स्थिति समझने के बाद उन्होंने बिना देर किए परिवार की मदद करने का फैसला किया। एक महिला और मां होने के नाते उन्होंने प्रसूता महिला की परेशानी को समझा और उसे, उसके पति तथा नवजात बच्ची को सम्मानपूर्वक अपनी महापौर की आधिकारिक गाड़ी में बैठाया।

महापौर रितू तावड़े ने खुद नवजात बच्ची को गोद में लिया और परिवार को सुरक्षित कुर्ला के खैरानी रोड स्थित उनके घर तक पहुंचाया। घर पहुंचने के बाद उन्होंने बच्ची को उसकी मां के हाथों में सौंपा और पूरे परिवार को दिल से शुभकामनाएं व आशीर्वाद दिए।

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद नवजात बच्ची का घर तक पहला सफर सीधे महापौर की गाड़ी में तय हुआ। परिवार के लिए यह पल बेहद भावुक और यादगार बन गया। महापौर की इस सहृदयता और संवेदनशीलता की पूरे इलाके में जमकर तारीफ हो रही है।

यह घटना उस मानवीय संवेदना को सामने लाती है, जिसमें एक मां ने दूसरी मां की परेशानी को समझते हुए मदद का हाथ बढ़ाया और नवजात बच्ची का पहला सफर परिवार के लिए यादगार बना दिया।

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