मुंबई (कार्यालय संवाददाता)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आर्थिक विकास और मुद्रास्फीति के अपने अनुमानों में संशोधन करते हुए विकास दर को 7.3 प्रतिशत और खुदरा मुद्रास्फीति को 2 प्रतिशत करने का ऐलान किया है। यह निर्णय केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद लिया गया।

आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को बताया कि घरेलू आर्थिक संकेतक मजबूत बने हुए हैं। कृषि उत्पादन में सुधार, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में सुधारों से राजस्व में स्थिरता, मुद्रास्फीति का नियंत्रण, और कंपनियों व बैंकों की सुदृढ़ बैलेंसशीट जैसी स्थितियां अर्थव्यवस्था की मजबूती की ओर इशारा करती हैं। उन्होंने कहा कि सेवा क्षेत्र का निर्यात स्थिर रहने की संभावना है, जबकि वस्तु निर्यात में कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं।

आरबीआई ने अक्टूबर में पहले वित्त वर्ष 2025-26 की जीडीपी वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत अनुमानित की थी। लेकिन अब संशोधित आंकड़ों के अनुसार तीसरी तिमाही में 7 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 6.5 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद है। अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में विकास दर 6.7 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 6.8 प्रतिशत रहने की संभावना है।

मल्होत्रा ने खुदरा मुद्रास्फीति पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि अक्टूबर में यह मात्र 0.25 प्रतिशत दर्ज की गई, जो मौजूदा सीरीज (2012 आधार वर्ष) में सबसे कम है। खासकर खाद्य और पेय पदार्थों की महंगाई कम रहने के कारण मुद्रास्फीति में अनुमान से अधिक गिरावट आई। खरीफ की अच्छी फसल और बेहतर आपूर्ति व्यवस्था के चलते इस वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान दो प्रतिशत किया गया है। चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में यह 0.6 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 2.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि अगले वित्त वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही में क्रमशः 3.9 और 4 प्रतिशत मुद्रास्फीति रहने की संभावना जताई गई है।

आरबीआई की यह समीक्षा आर्थिक स्थिरता और विकास की दिशा में सकारात्मक संकेत देती है, जिससे निवेशकों, व्यवसायों और आम जनता को आगे आने वाले महीनों में आर्थिक गतिविधियों को लेकर विश्वास और मार्गदर्शन मिलेगा।

Pratahkal Bureau

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