मुंबई में सियासी घमासान: बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासियों के मुद्दे पर कांग्रेस ने मुख्यमंत्री को घेरा, आंकड़ों की मांग से गर्माई राजनीति
मुंबई में अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर राजनीतिक उबाल! मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासियों की पहचान के दावे पर कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने तीखा पलटवार किया है। कांग्रेस ने सरकार से इन प्रवासियों के आधिकारिक आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की है और मुख्यमंत्री को 'सपनों का सौदागर' बताते हुए पुराने अधूरे वादों पर जवाबदेही तय करने को कहा है।

मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत में 'अवैध प्रवासी' एक बार फिर केंद्र बिंदु बनकर उभरे हैं, जिसने सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी जुबानी जंग छेड़ दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा राज्य में अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या प्रवासियों की पहचान करने के बड़े दावे के बाद, अब कांग्रेस ने सीधे तौर पर सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता सचिन सावंत ने मुख्यमंत्री के बयानों को चुनौती देते हुए मांग की है कि यदि सरकार ने वास्तव में इन प्रवासियों की पहचान कर ली है, तो उसे हवा-हवाई दावों के बजाय इनके आधिकारिक और प्रामाणिक आंकड़े सार्वजनिक पटल पर रखने चाहिए। यह विवाद उस समय और गहरा गया जब मुख्यमंत्री ने आगामी निकाय चुनावों के मद्देनजर 'महायुति' के घोषणापत्र के दौरान मुंबई को इन प्रवासियों से मुक्त करने का संकल्प दोहराया।
इस राजनीतिक टकराव की नींव तब पड़ी जब देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई महानगरपालिका चुनाव के लिए सत्तारूढ़ ‘महायुति’ के घोषणापत्र का अनावरण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने एक तकनीकी समाधान का प्रस्ताव रखते हुए घोषणा की कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के सहयोग से एक विशेष आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल विकसित किया जाएगा, जो बांग्लादेशी प्रवासियों की सटीक पहचान करने में मदद करेगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी सरकार मुंबई को अवैध घुसपैठियों से मुक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है और राज्य में अवैध प्रवासियों की सबसे बड़ी संख्या को चिन्हित करने का कार्य सफलतापूर्वक किया गया है।
हालांकि, विपक्षी खेमे ने इन दावों को चुनावी स्टंट करार देते हुए पलटवार करने में देरी नहीं की। सचिन सावंत ने मुख्यमंत्री फडणवीस पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें "सपनों का सौदागर" की संज्ञा दे डाली। सावंत का तर्क है कि मुख्यमंत्री वर्तमान की ज्वलंत समस्याओं और कड़वी वास्तविकताओं से जनता का ध्यान भटकाने के लिए भविष्य के सुनहरे और काल्पनिक सपने दिखा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के अधिकांश संबोधन और साक्षात्कार केवल आगामी योजनाओं के इर्द-गिर्द घूमते हैं, जबकि पिछले वादों की जवाबदेही पर सरकार पूरी तरह मौन साधे रहती है। कांग्रेस प्रवक्ता ने तंज कसते हुए कहा कि 'तारीख पर तारीख' देना अब इस सरकार की कार्यशैली का स्थायी हिस्सा बन चुका है।
अपनी दलीलों को मजबूती देने के लिए सावंत ने सरकार की पुरानी घोषणाओं का हवाला देते हुए कहा कि 2017 में ईस्टर्न फ्रीवे को ठाणे से जोड़ने और मुंबई को उसी वर्ष बाढ़-मुक्त करने के वादे आज भी कागजों तक ही सीमित हैं। उन्होंने आर्थिक मोर्चे पर भी सरकार को घेरते हुए कहा कि 2019 से महाराष्ट्र को एक हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत में राज्य इस लक्ष्य से कोसों दूर खड़ा है। यह पूरा प्रकरण न केवल सुरक्षा और घुसपैठ के मुद्दे को दर्शाता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि आगामी चुनाव विकास बनाम पहचान की राजनीति के बीच एक जटिल मोड़ लेने वाले हैं, जहां विपक्ष अब सरकार से हर दावे का ठोस प्रमाण मांग रहा है।

Pratahkal Bureau
प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
