मुंबई विधानसभा में भाजपा विधायक राम कदम ने कबूतरों से जुड़ी फेफड़ों की गंभीर बीमारी का मुद्दा उठाया। अध्यक्ष ने विशेषज्ञ समिति गठित करने के निर्देश दिए।

मुंबई सहित पूरे राज्य में कबूतरों के कारण इंसानी फेफड़ों को होने वाले गंभीर नुकसान और जानलेवा बीमारियों का मुद्दा मंगलवार को विधानसभा में पूरी गंभीरता के साथ उठा। घाटकोपर पश्चिम से भाजपा विधायक राम कदम ने औचित्य के मुद्दे के तहत अपनी दिवंगत मां के स्वास्थ्य संकट का हवाला देते हुए इस संवेदनशील विषय को सदन के सामने रखा। उनके भावुक वक्तव्य के बाद विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने मामले की जांच के लिए चिकित्सा विशेषज्ञों की विशेष समिति गठित करने के निर्देश दिए।

राम कदम ने भरे गले से सदन को बताया कि उनकी मां का 12 जून को निधन हो गया, लेकिन जीवन के अंतिम दो वर्षों में उन्हें मरणासन्न और असहनीय पीड़ा से गुजरना पड़ा। उन्होंने कहा कि उनकी मां फेफड़ों की गंभीर बीमारी ‘आईएलडी’ से पीड़ित थीं, जिसका पूरी दुनिया में कोई सटीक इलाज उपलब्ध नहीं है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह अत्यंत पीड़ादायक बीमारी मुख्य रूप से कबूतरों की बीट से हवा में फैलने वाले खतरनाक विषाणुओं के कारण और अधिक घातक रूप ले लेती है।

अपनी मां की तकलीफों का उल्लेख करते हुए राम कदम ने बताया कि अंतिम समय में उन्हें चौबीसों घंटे ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहना पड़ता था। फेफड़ों में फाइब्रोसिस को बढ़ने से रोकने के लिए केवल नाममात्र की दवाइयां उपलब्ध थीं। उन्होंने कहा कि उनकी मां बिना रुके पंद्रह-पंद्रह मिनट तक लगातार खांसती रहती थीं और खांसते-खांसते अचेत हो जाती थीं। उन्होंने सदन में यह भी कहा कि भारत में हर वर्ष लगभग नौ लाख लोग इस बीमारी की चपेट में आकर दम तोड़ देते हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उनकी मां ने जिस दर्दनाक दौर का सामना किया, वैसी पीड़ा भविष्य में किसी अन्य मां या परिवार को न झेलनी पड़े, इसलिए उन्होंने यह जनहित का मुद्दा विधानसभा में उठाया।

मुंबई की करोड़ों की आबादी को इस खतरे से बचाने के लिए राम कदम ने सुझाव दिया कि शहर के कबूतरों को सुरक्षित तरीके से संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में स्थानांतरित किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे धार्मिक भावनाओं का पूरा सम्मान करते हैं और रातों-रात कबूतरों को दाना देना बंद करने के पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले दादर के ऐतिहासिक कबूतरखाने को बंद किए जाने के बाद दाने के अभाव में कई कबूतरों की जान चली गई थी, जिसके विरोध में जैन समुदाय ने बड़ा आंदोलन भी किया था।

राम कदम ने कहा कि कबूतरों को भी जीने का पूरा अधिकार है, इसलिए विदेशों की तर्ज पर मुंबई में भी उनके स्थानांतरण और जन्म नियंत्रण जैसे वैज्ञानिक उपाय अपनाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि बोरीवली स्थित राष्ट्रीय उद्यान में 50 हजार एकड़ की विशाल जगह उपलब्ध है, जहां कबूतर सुरक्षित रह सकते हैं।

सदन में उठाए गए इस स्वास्थ्य संबंधी गंभीर मुद्दे का संज्ञान लेते हुए विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने राज्य सरकार को तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने सरकार को आदेश दिया कि कबूतरों के कारण फैलने वाली फेफड़ों की गंभीर बीमारियों का विस्तृत अध्ययन करने के लिए चिकित्सा विशेषज्ञों की एक विशेष समिति गठित की जाए और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की उचित प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

Pratahkal Bureau

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