मुंबई। मुंबई मोनोरेल के अचानक अनिश्चितकालीन बंद होने के फैसले से यात्रियों को न केवल परिवहन असुविधा का सामना करना पड़ा है, बल्कि उनके रिचार्ज किए गए प्रीपेड कार्ड का बैलेंस भी अटक गया है। मोनोरेल में सफर करने वाले यात्री अपने कार्ड में पहले से बैलेंस डालकर यात्रा करते थे। अब सेवाएं स्थगित हो जाने से इन पैसों को लेकर यात्रियों की चिंता बढ़ गई है।

मोनोरेल का परिचालन बंद किए जाने के तुरंत बाद जब यह सवाल उठाया गया कि यात्रियों के पहले से भरे गए रिचार्ज का क्या होगा, तो मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने आश्वासन दिया कि यात्रियों के पैसे सुरक्षित हैं। एमएमआरडीए ने कहा है कि रिचार्ज की वैधता आगे बढ़ाई जा सकती है और इस संबंध में आवश्यक तकनीकी व्यवस्था की जाएगी। हालांकि, इस पर स्पष्ट समयसीमा अभी तय नहीं की गई है।

मोनोरेल परियोजना की शुरुआत मुंबई की बढ़ती यातायात चुनौतियों से निपटने के लिए बड़े सपनों के साथ हुई थी। 20 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर चेंबूर से संत गाडगे महाराज चौक तक फैला हुआ है। परियोजना का काम वर्ष 2010 में आरंभ हुआ और 2 फरवरी 2014 को इसका पहला चरण चेंबूर से वडाला तक यात्री सेवा के लिए खोला गया। इसके बाद 3 मार्च 2019 को गुरु तेग बहादुर नगर से सात रस्ता तक का पूरा मार्ग चालू कर दिया गया।

मोनोरेल सेवा में हर पंद्रह मिनट पर छह ट्रेनें चलती थीं और प्रतिदिन औसतन 142 फेरे लगाए जाते थे। शुरुआती दिनों में इस परियोजना को लेकर यात्रियों में खासा उत्साह देखा गया था। लोगों को उम्मीद थी कि यह सेवा मुंबई की भीड़भाड़ और जाम की समस्या से बड़ी राहत दिलाएगी। लेकिन धीरे-धीरे तकनीकी समस्याएं और प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियां सामने आती रहीं।

बीते कुछ महीनों में मोनोरेल बार-बार तकनीकी खराबियों के कारण रुकती रही। नतीजा यह हुआ कि यात्री संख्या में लगातार गिरावट आई और अंततः इसे अनिश्चितकालीन बंद करने का निर्णय लेना पड़ा। इस फैसले ने उन हजारों यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं, जो रोजाना इस सेवा का उपयोग करते थे। अब उन्हें टैक्सियों, निजी वाहनों और बेस्ट बसों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

एमएमआरडीए का कहना है कि मोनोरेल सेवाओं को पूरी तरह बंद करना एक अस्थायी कदम है। संस्था ने आश्वासन दिया है कि इस दौरान आधुनिकीकरण और तकनीकी सुधार का कार्य किया जाएगा। नई ट्रेनों और आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली की स्थापना के बाद मोनोरेल को सुरक्षित और प्रभावी रूप से फिर से शुरू करने की योजना है। हालांकि, जब तक यह सेवा पुनः शुरू नहीं होती, यात्रियों के प्रीपेड बैलेंस को लेकर असमंजस बना रहेगा। फिलहाल एमएमआरडीए ने यात्रियों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि उनके पैसे व्यर्थ नहीं जाएंगे।

मोनोरेल की कहानी एक ओर जहां अधूरी उम्मीदों और चुनौतियों की झलक पेश करती है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी छोड़ती है कि भविष्य में मुंबई जैसी महानगर की परिवहन परियोजनाओं को स्थायी और विश्वसनीय कैसे बनाया जाए।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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