पर्युषण पर्व में व्रत चेतना दिवस पर आत्म शुद्धि और विकास के लिए 12 व्रत अपनाने पर जोर
डोंबिवली के तेरापंथ भवन में पर्युषण पर्व के पांचवें दिन व्रत चेतना दिवस मनाया गया। अर्जुन मेड़तवाल, गेहरीलाल बाफना और मनोज सिंघवी ने 12 व्रत, आत्म शुद्धि और आत्म विकास का महत्व बताया।

तस्वीर में डोंबिवली के तेरापंथ भवन में आयोजित बारह व्रत कार्यशाला के दौरान उपस्थित वक्ता, साधक और श्रद्धालु नजर आ रहे हैं।
मुंबई। पर्वाधिराज पर्युषण का पांचवां दिवस व्रत चेतना दिवस के रूप में मनाया गया। गुरुदेव आचार्य महाश्रमण की आज्ञा से सूरत से समागत उपासक द्वय अर्जुन मेड़तवाल एवं गेहरीलाल बाफना के निर्देशन में पर्युषण पर्व के पांचवें दिन विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, डोंबिवली के तत्वावधान में तेरापंथ भवन, डोंबिवली में आयोजित विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए प्रवक्ता उपासक अर्जुन मेड़तवाल ने कहा कि भगवान महावीर ने दो प्रकार के धर्मों का प्रवर्तन किया—अणगार धर्म एवं अगार धर्म। अणगार धर्म या महाव्रत धर्म साधुओं के लिए तथा अगार धर्म या अणुव्रत धर्म श्रावकों या गृहस्थों के लिए होता है।
उन्होंने कहा कि अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह पांच अणुव्रत हैं। इनके साथ तीन गुणव्रत और चार शिक्षाव्रत जुड़ने से 12 व्रत बनते हैं। बारह व्रत का मार्ग आत्म कल्याण का मार्ग है।
तेरापंथ युवक परिषद डोंबिवली द्वारा आयोजित बारह व्रत कार्यशाला के संभागियों को संबोधित करते हुए अर्जुन मेड़तवाल ने कहा कि जन्मना जैन होना अधिक महत्वपूर्ण नहीं है। अधिक महत्वपूर्ण कर्मणा जैन बनना है, अर्थात भगवान महावीर द्वारा निर्देशित बारह व्रतधारी श्रावक बनना है।
सहयोगी उपासक गेहरीलाल बाफना ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को बारह व्रती श्रावक बनना चाहिए। बारह व्रत को धारण करने वाला बहुत सारे व्यवधानों को पार कर लेता है। बारह व्रती श्रावक बनना जीवन के ऊर्ध्वारोहण करने का मार्ग है। यह पाप कर्मों से दूर रहने एवं आत्म शुद्धि-आत्म विकास का मार्ग है।
अणुव्रत विश्व भारती के महामंत्री मनोज सिंघवी ने कहा कि व्रत धारण करने से हमारी सुरक्षा होती है। 12 व्रतों में भी मूल तो पांच अणुव्रत ही हैं। इन्हीं का विस्तार बारह व्रत है। उन्होंने कहा कि जो जैन श्रावक हैं, उन्हें बारह व्रती श्रावक बनना चाहिए। जो अजैन गृहस्थ हैं, वे भी अणुव्रती बन सकते हैं।
मनोज सिंघवी ने कहा कि अणुव्रत की आचार संहिता जन-जन के कल्याण की आचार संहिता है। जाति, प्रांत आदि किसी प्रकार के भेदभाव के बिना हर कोई इसे अपना सकता है।
कार्यक्रम के अंत में तेरापंथ युवक परिषद डोंबिवली के अध्यक्ष विपिन मेहता ने आभार ज्ञापन किया। पर्युषण पर्व के व्रत चेतना दिवस पर आयोजित धर्मसभा और बारह व्रत कार्यशाला में आत्म शुद्धि, आत्म विकास तथा व्रतधारी श्रावक बनने के महत्व पर वक्ताओं ने जोर दिया।

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