भांडुप-मुलुंड जैन संघ में पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन गजसुकुमाल का प्रसंग
मुंबई के भांडुप-मुलुंड स्थित जैन संघ में पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन अंतगड सूत्र के माध्यम से गजसुकुमाल का प्रसंग सुनाया गया। महिला मंडल ने प्रभु महावीर एवं चंदना पर नाटिका प्रस्तुत की।

तस्वीर में भांडुप-मुलुंड के जैन संघ हॉल में पर्युषण महापर्व के अवसर पर प्रवचन सुनते हुए महिला और पुरुष श्रद्धालु दिखाई दे रहे हैं।
मुंबई। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ मेवाड़ भांडुप-मुलुंड में पर्युषण महापर्व के तृतीय दिवस धर्म, स्वाध्याय और तपस्या के संदेश के साथ मनाया गया। कुवारीया स्वाध्याय केंद्र से आए रतन लाल मारू एवं महेंद्र बोहरा के सानिध्य में आयोजित प्रवचन में अंतगड सूत्र के माध्यम से गजसुकुमाल के जीवन प्रसंग का वर्णन किया गया।
प्रवचन में बताया गया कि गजसुकुमाल ने ऊंचे भाव से दीक्षा ग्रहण की और प्रभु अरिष्टनेमी से आज्ञा लेकर माहकाल शमशान में बाहरवीं भिक्षु प्रतिमा ग्रहण की। पूर्व भव के वैर के कारण सोमाली ब्राह्मण ने गजसुकुमाल के सिर पर मिट्टी की पाल बांधी और धधकते अंगारे सिर पर डाल दिए। इसके बावजूद मुनि ने इस पीड़ा पर अर्थ ध्यान नहीं किया। उन्होंने इसे संयम में अपना सहायक समझा और मन में लेशमात्र भी राग-द्वेष नहीं रखा। इस प्रकार वह आत्मा शुद्ध बोध को प्राप्त हो गई।
प्रवचन में कहा गया कि इसी प्रसंग से प्रेरणा लेकर जीवन को राग-द्वेष से रहित बनाना चाहिए। पर्युषण महापर्व के दौरान धर्म और ध्यान के माध्यम से आत्मा का कल्याण करने का प्रयास करना चाहिए। इस महापर्व पर सभी को अधिक से अधिक त्याग और तपस्या कर अपने जीवन को उज्ज्वल बनाने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान महिला मंडल की ओर से प्रभु महावीर एवं चंदना पर एक नाटिका प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम में संघ अध्यक्ष बलवंत बोलीया, मंत्री सुरेश बंबोरी, कोषाध्यक्ष सुरेश चपलोत सहित महिला मंडल और कन्या मंडल आदि उपस्थित रहे। यह जानकारी ओंकारलाल बंबोरी ने दी।

Naresh Ameta (Mumbai)
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