पालघर: भ्रष्टाचार के विरुद्ध कड़ा प्रहार करते हुए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने तारापुर ग्राम पंचायत की महिला सरपंच को चार हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों धरदबोचा है। यह बड़ी कार्यवाही एसीबी पालघर के एसीपी दादा करांडे के कुशल मार्गदर्शन में अंजाम दी गई, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

घटना के विस्तृत विवरण के अनुसार, शिकायतकर्ता अपनी बहन के साथ मिलकर एक छोटा व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रहे थे। इस उद्यम हेतु उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में ऋण के लिए आवेदन किया था, जिसके लिए बैंक में आवश्यक दस्तावेज़ जमा करने अनिवार्य थे। इन्हीं दस्तावेजों में शामिल एनओसी (NOC) और अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए जब उन्होंने तारापुर ग्राम पंचायत से संपर्क किया, तो वहां उपस्थित सरपंच संध्या संजय पागधरे ने इन कागजातों को बनाने के एवज में पांच हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। एक जनसेवक द्वारा कर्तव्य निर्वहन के बदले धन की मांग किए जाने से क्षुब्ध होकर शिकायतकर्ता ने तुरंत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, पालघर का रुख किया और सरपंच के विरुद्ध औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत की गंभीरता को देखते हुए एसीपी दादा करांडे के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम में पीआई राकेश डांगे, विलास भोये, नवनाथ भगत, जितेंद्र गवले, गीता कहार और आकाश लोहरे शामिल थे। 13 मई 2026 की शाम लगभग 5 बजे टीम ने तारापुर ग्राम पंचायत कार्यालय में योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। जैसे ही सरपंच संध्या संजय पागधरे ने शिकायतकर्ता से रिश्वत की राशि के रूप में चार हजार रुपये स्वीकार किए, एसीबी की टीम ने उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया। आरोपी सरपंच के खिलाफ तारापुर पुलिस स्टेशन में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया है। वर्तमान में पुलिस इस मामले की गहन जांच और आगे की कानूनी कार्यवाही में जुट गई है। यह कार्यवाही स्पष्ट संदेश देती है कि जनसेवा की आड़ में भ्रष्टाचार करने वाले किसी भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि को बख्शा नहीं जाएगा।

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