ओडीसी क्षेत्र में सड़कों और नालों के हस्तांतरण को लेकर बीएमसी और एमएमआरडीए के बीच प्रशासनिक गतिरोध से जलजमाव का खतरा बढ़ गया है।

महानगर में मॉनसून की पदचाप के साथ ही जलजमाव का भयावह डर गहराने लगा है, किंतु ओशिवारा के राम मंदिर क्षेत्र में दो बड़े प्रशासनिक निकायों की खींचतान ने प्री-मॉनसून कार्यों की गति पर विराम लगा दिया है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) और मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) के बीच छिड़े अधिकार क्षेत्र के इस विवाद ने ओशिवारा डिस्ट्रिक्ट सेंटर (ओडीसी) के निवासियों की रातों की नींद उड़ा दी है। विडंबना यह है कि क्षेत्र की सड़कों और नालों की सफाई का अति-महत्वपूर्ण कार्य धरातल पर उतरने के बजाय वर्तमान में केवल सरकारी पत्राचार की फाइलों में ही दम तोड़ रहा है।

इस गंभीर और संवेदनशील मुद्दे को लेकर स्थानीय भाजपा नगरसेवक संदीप पटेल ने बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े से व्यक्तिगत भेंट कर वस्तुस्थिति से अवगत कराया है। पटेल ने स्पष्ट रूप से कहा कि दोनों नियोजन प्राधिकरणों के बीच 'हैंडओवर' की पेचीदा प्रक्रिया पूर्ण न होने का खामियाजा अंततः निर्दोष आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। एमएमआरडीए का पक्ष है कि उसने ओडीसी के अंतर्गत आने वाली लगभग 4.22 किलोमीटर लंबी 12 सड़कों को बीएमसी को हस्तांतरित करने का विधिवत प्रस्ताव भेज दिया है, जिसके पश्चात अब रखरखाव और सफाई का समस्त उत्तरदायित्व बीएमसी का बनता है। इसके उलट, बीएमसी अधिकारियों का तर्क है कि जब तक हैंडओवर की समस्त कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूर्ण नहीं हो जातीं, तब तक विशेष नियोजन प्राधिकरण होने के नाते प्री-मॉनसून कार्यों का जिम्मा एमएमआरडीए को ही वहन करना होगा।

नगरसेवक संदीप पटेल ने इस गतिरोध पर कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अविलंब नालों और सड़क किनारे की नालियों की सफाई का कार्य प्रारंभ नहीं किया गया, तो ओशिवारा डिस्ट्रिक्ट सेंटर में आगामी मॉनसून के दौरान विनाशकारी बाढ़ जैसे हालात उत्पन्न हो सकते हैं। उन्होंने आयुक्त से पुरजोर मांग की है कि विभाग की तकनीकी सीमाओं से ऊपर उठकर जनहित में कार्य तुरंत शुरू किया जाना चाहिए। पटेल इस संदर्भ में शीघ्र ही एमएमआरडीए आयुक्त से भी भेंट करेंगे। वर्तमान में, जहां एमएमआरडीए विकास कार्यों की पूर्णता का दावा कर अपना पल्ला झाड़ रहा है, वहीं बीएमसी प्रक्रियात्मक त्रुटियों का हवाला दे रही है। इस प्रशासनिक खींचतान के मध्य ओशिवारा के निवासी स्वयं को लाचार और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, क्योंकि बारिश के आगमन में अब बहुत कम समय शेष है और क्षेत्र के नालों में कचरे का अंबार लगा हुआ है, जो तबाही को खुला निमंत्रण दे रहा है।

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