मुंबई में सार्वजनिक स्थान पर कबूतरों को दाना डालने पर पहली सजा, नितिन शेठ दोषी ठहराए गए
मुंबई में सार्वजनिक स्थान पर कबूतरों को दाना डालने पर पहली सजा, नितिन शेठ को दोषी ठहराया गया। बांद्रा की 9वीं अदालत ने बीएनएस 2023 की धाराओं 223(बी) और 271 के तहत 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और सरकारी आदेशों के उल्लंघन को गंभीर अपराध बताया।

मुंबई। शहर में सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े नियमों के उल्लंघन के मामलों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा इस जुलाई में सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों को दाना डालने पर रोक लगाने के आदेश के बाद, अब इस तरह के पहले मामले में सजा सुनाई गई है। बांद्रा की मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने दादर निवासी 52 वर्षीय व्यवसायी नितिन शेठ को सार्वजनिक स्थान पर कबूतरों को दाना डालने का दोषी ठहराया।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वी. यू. मिसाल की 9वीं अदालत ने 22 दिसंबर को सुनवाई के बाद फैसला सुनाते हुए नितिन शेठ को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 223(बी) और 271 के तहत दोषी ठहराया। इन धाराओं के तहत लोक सेवक के वैध आदेश की अवहेलना और ऐसे कृत्य से जुड़ा अपराध शामिल है, जिससे किसी खतरनाक बीमारी के फैलने की आशंका होती है। अदालत ने इन दोनों आरोपों में क्रमशः 3,000 रुपये और 2,000 रुपये का जुर्माना लगाया।
पुलिस के अनुसार, 1 अगस्त को मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि नितिन शेठ ने एल. जे. रोड पर हिंदुजा अस्पताल के पास कबूतरखाने के नजदीक कबूतरों को दाना डाला। पुलिस ने बताया कि यह कृत्य मानव जीवन और स्वास्थ्य के लिए खतरा था और इससे बीमारियों के फैलने की संभावना थी। मजिस्ट्रेट ने कहा कि आरोपी ने जानबूझकर या लापरवाही से ऐसा कृत्य किया, जिसे करते समय उसे यह अंदेशा था कि इससे जीवन के लिए खतरनाक बीमारी फैल सकती है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी आदेशों का उल्लंघन करना दंडनीय अपराध है। मुंबई में सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों को दाना डालना सार्वजनिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से प्रतिबंधित और अवैध माना गया है। जुलाई में हाई कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि सार्वजनिक क्षेत्रों में कबूतरों को दाना डालने वाले व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला न केवल कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके सामाजिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभाव भी गंभीर हैं। हालांकि पक्षी प्रेमियों और कुछ समुदायों के बीच इसे धार्मिक या सामाजिक कर्तव्य माना जाता है, अदालत का निर्णय यह संकेत देता है कि नियमों और सार्वजनिक स्वास्थ्य की प्राथमिकता सर्वोपरि है। इस मामले में माहिम पुलिस स्टेशन ने आरोपपत्र दाखिल किया और कार्यवाही के दौरान नितिन शेठ ने आरोप स्वीकार कर अदालत से नरमी की भी मांग की।
इस फैसले ने स्पष्ट संदेश दिया है कि मुंबई में सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े नियमों का उल्लंघन अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में ऐसे कृत्यों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- मुंबई कबूतर दाना डालना सजाNitin Sheth Mumbai pigeon feeding caseबांद्रा मजिस्ट्रेट अदालत फैसलाV.U. Misal 9वीं अदालतMumbai public health rules violationpigeon feeding fine Mumbaiमुंबई में सरकारी आदेश उल्लंघनBombay High Court pigeon feeding banकबूतरों को दाना डालना कानूनमुंबई 2025 सार्वजनिक स्वास्थ्य मामलाNitin Sheth दोषी ठहराए गएMumbai bird feeding legal casepigeon feeding fine 2025Mumbai public safety enforcementबांद्रा pigeon feeding court case

Pratahkal Bureau
प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
