चेम्बूर में नवरात्रि अनुष्ठान: साध्वी निर्वाणश्री ने साधना और जप का महत्व बताया
मुंबई के चेम्बूर में नवरात्रि अनुष्ठान के सातवें दिन साध्वी निर्वाणश्री ने साधना और जप का महत्व बताया। वहीं, साध्वी डॉ. योगक्षेमप्रज्ञा ने कालसर्प दोष के यथार्थ और मिथक पर विचार रखते हुए भगवान पार्श्वनाथ के जप का उल्लेख किया।

मुंबई के चेम्बूर में आयोजित नवरात्रि अनुष्ठान के सातवें दिन साध्वी निर्वाणश्री का प्रवचन सुनते श्रद्धालु।
मुंबई के चेम्बूर में नवरात्रि अनुष्ठान के सातवें दिन साधना, आराधना और जप के महत्व के साथ कालसर्प दोष के यथार्थ और मिथक पर विचार व्यक्त किए गए। आचार्य महाश्रमण की विदुषी सुशिष्या साध्वी निर्वाणश्री ने कहा कि नवरात्रि के नौ दिन आध्यात्मिक ऊर्जा के संवर्धन के लिए श्रेष्ठ समय हैं। इन दिनों साधना, आराधना और जप के माध्यम से चैतन्य को भावित करने पर ध्यान देना चाहिए।
साध्वी निर्वाणश्री ने कहा कि तपपूर्वक किया गया जप विशेष प्रभावकारी होता है। भोजन के प्रति अनासक्ति होने पर भोजन भी साधना में सहायक बन जाता है। उन्होंने नवरात्रि के दौरान आध्यात्मिक अभ्यास और संयम के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर ‘कालसर्प दोष : यथार्थ या मिथक’ विषय पर साध्वी डॉ. योगक्षेमप्रज्ञा ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि कालसर्प दोष एक विशेष खगोलीय घटना है, लेकिन इसका प्रभाव हमेशा बुरा ही रहे, यह आवश्यक नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कोई ज्योतिषी या पंडितजी इसके विधान का सुझाव दें, तो भगवान पार्श्वनाथ के अनुष्ठानपूर्वक जप से चमत्कार हो सकता है। उन्होंने लोगों को प्रयोग करने और भयभीत नहीं होने की बात कहते हुए कहा कि समस्या का समाधान उनके अपने हाथ में है।
नवरात्रि अनुष्ठान के दौरान साध्वी लावण्यप्रज्ञा, साध्वी कुंदनयशा, साध्वी मुदितप्रज्ञा और साध्वी मधुरप्रभा ने नवग्रहगर्भित पार्श्वस्तुति का सह-संगान किया। पूरा अनुष्ठान उल्लासमय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में साधना, जप और आध्यात्मिक विषयों पर विचारों के साथ नवरात्रि अनुष्ठान का सातवां दिन संपन्न हुआ।

