मुंबई में फर्जी पहचान का काला कारोबार: जन्म प्रमाणपत्र रैकेट का सनसनीखेज खुलासा
मुंबई में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र रैकेट का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। कुर्ला, मुलुंड और देवनार पुलिस ने सरकारी लॉग-इन का दुरुपयोग कर फर्जी पहचान बनाने वाले गिरोह के खिलाफ FIR दर्ज की है। 15 लोगों पर नामजद कार्रवाई और 400 से अधिक संदिग्ध आवेदनों की जांच जारी है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे बने इस संगठित अपराध की पूरी विस्तृत रिपोर्ट यहां पढ़ें।

मुंबई। मायानगरी मुंबई की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक साख पर एक गहरा आघात पहुंचा है। शहर के अलग-अलग कोनों से सामने आए एक संगठित जालसाजी के मामले ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाने और उनमें अवैध रूप से बदलाव करने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है, जिसने मुंबई को फर्जी पहचान पत्र बनाने का एक खतरनाक केंद्र बना दिया है। कुर्ला, मुलुंड और देवनार पुलिस ने इस संबंध में अलग-अलग प्राथमिकियां (FIR) दर्ज कर इस गहरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ना शुरू कर दिया है।
इस पूरे गोरखधंधे का केंद्र बिंदु नगर निगम के महत्वपूर्ण सरकारी डेटा में सेंधमारी है। कुर्ला पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नगर निगम के एक चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी की आधिकारिक शिकायत के बाद कुल 15 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि इन आरोपियों ने सरकारी तंत्र की सुरक्षा में सेंध लगाकर ऐसे दस्तावेजों को जन्म दिया, जो किसी भी व्यक्ति की पहचान को कानूनी रूप से बदल सकते हैं।
जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। पता चला है कि नवंबर 2023 से लेकर अप्रैल 2025 के बीच एक उच्चाधिकारी के आधिकारिक लॉग-इन क्रेडेंशियल्स का दुरुपयोग किया गया। इस समयावधि में जन्म प्रमाणपत्रों में अनधिकृत संशोधन किए गए, जिसमें नाम, माता-पिता का विवरण और जन्म स्थान जैसी बुनियादी जानकारियों को बदल दिया गया। आरोपियों ने इस साजिश को अंजाम देने के लिए फर्जी आधार कार्ड और घर पर जन्म होने के झूठे हलफनामों का सहारा लिया। यह केवल दस्तावेजों की हेराफेरी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है, क्योंकि जन्म प्रमाणपत्र वह बुनियादी आधार है जिसके दम पर नागरिकता और अन्य सरकारी लाभ प्राप्त किए जाते हैं।
जालसाजी का यह दायरा केवल कुर्ला तक सीमित नहीं है। मुलुंड इलाके में भी इसी तरह की साजिश का पर्दाफाश हुआ है, जहां चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यहां की जांच ने पुलिस के सामने एक भयावह तस्वीर पेश की है, जिसमें 400 से अधिक विलंबित जन्म पंजीकरण (Delayed Birth Registration) के आवेदन अब संदेह के घेरे में हैं। पुलिस को पुख्ता आशंका है कि यह किसी एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह का हाथ है जो लंबे समय से शहर में फर्जी पहचान पत्र बनाने की फैक्ट्री चला रहा था।
देवनार पुलिस ने भी जाली दस्तावेजों के माध्यम से जन्म प्रमाणपत्र हासिल करने के गंभीर मामले में कानूनी शिकंजा कसा है। इन सभी मामलों में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। नगर निगम के अधिकारियों और पुलिस बल का स्पष्ट मानना है कि इस प्रकार का फर्जीवाड़ा प्रशासनिक व्यवस्था को पंगु बनाने के साथ-साथ देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। फिलहाल पुलिस की टीमें उन मास्टरमाइंड्स की तलाश में जुटी हैं, जिन्होंने सरकारी लॉग-इन तक पहुंच बनाई और पहचान की शुचिता को तार-तार कर दिया। आने वाले दिनों में इस जांच की आंच कई और लोगों तक पहुंचनी तय मानी जा रही है।

Pratahkal Bureau
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