मुंबई में 15 मई से 10% पानी की कटौती, बीएमसी ने जारी किए निर्देश
जलाशयों में 23.52% जलस्तर शेष रहने और अल नीनो के प्रभाव को देखते हुए बीएमसी ने मुंबई, ठाणे और भिवंडी में जलापूर्ति कम करने का निर्णय लिया है।

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पर जल संकट के बादल मंडराने लगे हैं, जिसके चलते बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने पूरे महानगर क्षेत्र में जलापूर्ति में कटौती का एक बड़ा और कड़ा निर्णय लिया है। मुंबई को पानी की आपूर्ति करने वाले प्रमुख जलाशयों में जलस्तर के गिरते ग्राफ और भविष्य की अनिश्चितताओं को देखते हुए, आगामी शुक्रवार यानी 15 मई 2026 से पूरे मुंबई शहर और उपनगरों में 10 प्रतिशत पानी की कटौती लागू कर दी जाएगी। बीएमसी का यह एहतियाती कदम न केवल वर्तमान में उपलब्ध न्यूनतम जल भंडार का परिणाम है, बल्कि मौसम विभाग द्वारा अगले साल के लिए जताए गए 'अल नीनो' के प्रभाव और आगामी मानसून के दौरान कम वर्षा होने के पूर्वानुमानों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
प्रशासनिक आंकड़ों की संवेदनशीलता को स्पष्ट करते हुए बीएमसी ने जानकारी दी है कि वर्तमान में मुंबई के जलाशयों में मात्र 23.52 प्रतिशत उपयोगी जल ही शेष बचा है। भीषण गर्मी और तेज वाष्पीकरण के कारण जल स्तर में आ रही तीव्र गिरावट ने नगर निकाय की चिंता बढ़ा दी है, जिससे मानसून के आगमन तक शहर की प्यास बुझाने की चुनौती खड़ी हो गई है। हालांकि, बीएमसी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मुंबईकरों को घबराने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि भातसा और अपर वैतरणा बांधों से अतिरिक्त आरक्षित स्टॉक प्राप्त होने वाला है। यह कटौती केवल मुंबई तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ठाणे, भिवंडी-निजामपुर नगर निगम और बीएमसी से जलापूर्ति प्राप्त करने वाले अन्य गांवों पर भी समान रूप से प्रभावी होगी।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए बीएमसी ने सभी नागरिकों से पानी के 'किफायती उपयोग' का विनम्र आह्वान करते हुए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने सलाह दी है कि नागरिक नहाने के लिए शॉवर के स्थान पर बाल्टी का उपयोग करें, वाहनों को धोने के लिए पाइप के बजाय गीले कपड़े का इस्तेमाल करें और घरों में नल की लीकेज को तुरंत दुरुस्त करवाएं। इसके अतिरिक्त, होटलों और हाउसिंग सोसायटियों से विशेष अनुरोध किया गया है कि वे पानी की बचत सुनिश्चित करने वाले 'नोजल' लगाएं और छतों पर स्थित टंकियों को ओवरफ्लो होने से बचाएं। यह जल कटौती तब तक प्रभावी रहेगी जब तक कि जलाशयों में पर्याप्त वर्षा जल का संचयन नहीं हो जाता, जो आगामी दिनों में मुंबई की जल सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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