मुंबई पर आने वाले दिनों में भीषण जल संकट के बादल मंडरा रहे हैं। भीषण गर्मी के कारण जलाशयों से पानी का तेजी से होता वाष्पीकरण और मानसून की बेरुखी ने स्थिति को अत्यंत गंभीर बना दिया है। मुंबई को जल आपूर्ति करने वाले सातों बांधों में जलस्तर लगातार गिर रहा है, जिससे प्रशासनिक हलकों में चिंता का माहौल है। इस विकट स्थिति को देखते हुए, बीएमसी की स्थाई समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने महापौर रितू तावडे को एक आधिकारिक पत्र लिखकर स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया है।

पत्र के माध्यम से प्रभाकर शिंदे ने मांग की है कि यदि समय रहते मानसून की सक्रियता नहीं बढ़ती है, तो मुंबईवासियों को गंभीर जल किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने बीएमसी प्रशासन को तत्काल प्रभाव से पानी की आपूर्ति, समान वितरण और सीमित उपयोग के लिए एक दीर्घकालीन एवं प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने का आग्रह किया है। इस प्रस्तावित योजना का मुख्य उद्देश्य भविष्य की अनिश्चितताओं से निपटना और जल का विवेकपूर्ण प्रबंधन सुनिश्चित करना है।

प्रभाकर शिंदे ने भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की उस चेतावनी का विशेष उल्लेख किया है, जिसमें इस वर्ष मुंबई शहर और उपनगरों में औसत से कम बारिश होने की आशंका जताई गई है। जून का महीना शुरू होने के बावजूद शहर में अब तक संतोषजनक वर्षा दर्ज नहीं की गई है, जिसके परिणामस्वरूप जलाशयों में उपलब्ध जल भंडार प्रतिदिन कम हो रहा है। स्थाई समिति अध्यक्ष ने जोर देते हुए कहा कि जल प्रबंधन एक अत्यंत संवेदनशील विषय है, जिसके लिए वर्तमान में उपलब्ध स्टॉक का अत्यंत सूझबूझ और कड़ाई के साथ उपयोग किया जाना अनिवार्य है। उन्होंने महापौर से इस संभावित संकट को टालने के लिए एहतियाती कदम उठाने और इस मामले को बीएमसी के सभी दलीय गुट नेताओं के समक्ष चर्चा व सर्वसम्मति हेतु रखने का अनुरोध किया है, ताकि समय रहते इस संकट का समाधान निकाला जा सके।

Pratahkal Newsroom

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