मुंबई महानगर पर भीषण जल संकट के बादल मंडराने लगे हैं। मानसून की सुस्त चाल और जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश की कमी के कारण महानगर को जलापूर्ति करने वाले सातों प्रमुख बांधों और जलाशयों का जलस्तर तेजी से गिर रहा है। ताजा प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, इन बांधों में अब कुल क्षमता का केवल 8.34 प्रतिशत उपयोगी पानी ही शेष बचा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) ने जल कटौती को और अधिक कड़ा करने की योजना बनाई है। वर्तमान में लागू 10 प्रतिशत की कटौती को बढ़ाना लगभग तय माना जा रहा है, ताकि सीमित जल भंडार को मानसून के आगमन तक सुरक्षित रखा जा सके।

जलाशयों की मौजूदा स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट है कि भातसा बांध में अभी जलस्तर संतोषजनक है, जबकि तानसा बांध का स्तर चिंताजनक रूप से नीचे गिर चुका है। स्थिति की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अप्पर वैतरणा बांध का उपयोगी जलस्तर न्यूनतम सीमा से भी नीचे चला गया है, जिसके कारण इसका लाइव स्टॉक वर्तमान में शून्य हो गया है। मुंबई की दैनिक आवश्यकता लगभग 4100 मिलियन लीटर पानी की है। बीएमसी द्वारा वर्तमान में लागू 10 प्रतिशत की कटौती से प्रतिदिन लगभग 400 मिलियन लीटर पानी की बचत हो रही है। यदि प्रशासन कटौती की सीमा को बढ़ाता है, तो इससे दैनिक बचत बढ़कर 800 मिलियन लीटर तक पहुंच जाएगी, जिससे बचे हुए स्टॉक के साथ अधिक दिनों तक काम चलाया जा सकेगा।

प्रशासनिक स्तर पर बीएमसी मौसम विभाग के साथ मिलकर मानसून की प्रगति की बारीकी से समीक्षा कर रही है। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने बीएमसी को सुरक्षित रखे गए आरक्षित कोटे के जल का उपयोग करने की आधिकारिक मंजूरी प्रदान कर दी है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि आरक्षित पानी का उपयोग केवल एक तात्कालिक समाधान है। यदि मानसून ने जल्द ही सक्रिय रूप नहीं लिया, तो केवल आरक्षित जल या वैकल्पिक स्रोतों के माध्यम से मुंबई की विशाल आबादी की प्यास बुझाना एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य सिद्ध होगा। आने वाले कुछ दिन मुंबई के लिए निर्णायक होंगे, जहां जल प्रबंधन और प्रकृति की कृपा पर ही महानगर की जीवनरेखा निर्भर है।

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