मुंबई के भायखला स्थित ऐतिहासिक और घनी आबादी वाले उमरखाडी इलाके के कायाकल्प का रास्ता साफ होता दिख रहा है। म्हाडा के मुंबई इमारत मरम्मत और पुनर्रचना बोर्ड ने क्लस्टर पुनर्विकास परियोजना के तहत यहां दशकों से जर्जर इमारतों में रह रहे 1,928 परिवारों को 500 वर्ग फुट के नए, आधुनिक और प्रशस्त घर देने का फैसला किया है। अब तक ये परिवार महज 180 वर्ग फुट के छोटे-छोटे कमरों में रहने को मजबूर थे।

म्हाडा के इस फैसले से क्षेत्र के 2,000 से अधिक परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है। उमरखाडी के 6.23 एकड़ क्षेत्र में 81 पुरानी और जर्जर इमारतें स्थित हैं, जिनमें 1,928 परिवार लंबे समय से पुनर्विकास का इंतजार कर रहे थे। अब इन खतरनाक इमारतों की जगह बहुमंजिला और सर्वसुविधायुक्त इमारतें बनाई जाएंगी।

पहले इस परियोजना को ठेकेदार मॉडल के तहत विकसित किया जाना था, लेकिन निवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए म्हाडा ने बीडीडी चाल की तर्ज पर अब खुद इस परियोजना को पूरा करने का निर्णय लिया है। परियोजना के तहत पात्र निवासियों को 500 वर्ग फुट के नए मकान दिए जाएंगे।

यह विशाल परियोजना दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में 36 इमारतों के पुनर्विकास का प्रस्ताव मंजूरी के लिए राज्य सरकार के गृहनिर्माण विभाग के पास भेजा गया है। वहीं, दूसरे चरण का प्रस्ताव जल्द तैयार किया जाएगा।

निवासियों के पुनर्वास के बाद म्हाडा के पास करीब 7.5 लाख वर्ग फुट की अतिरिक्त जगह बचेगी। इस जगह पर बनने वाले घरों को आम जनता के लिए लॉटरी के जरिए बेचा जाएगा। इससे पुनर्विकास के बाद उपलब्ध अतिरिक्त जगह का इस्तेमाल भी किया जाएगा।

अब परियोजना के लिए राज्य सरकार की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। मंजूरी मिलते ही उमरखाडी के पुनर्विकास का काम शुरू किया जाएगा। दशकों से 180 वर्ग फुट के छोटे कमरों और जर्जर इमारतों में रह रहे 1,928 परिवारों के लिए यह फैसला नए और पक्के घरों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Pratahkal Bureau

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