मुंबई में मानसून के दौरान पेड़ों के गिरने से बढ़ते जानलेवा हादसों के बीच बीएमसी की बड़ी प्रशासनिक कमी सामने आई है। 80,952 करोड़ रुपये के बजट के बावजूद 29.75 लाख पेड़ों की वैज्ञानिक जांच की व्यवस्था नहीं है, जबकि कंक्रीटीकरण और खुदाई को भी इस संकट की बड़ी वजह बताया जा रहा है।

मुंबई में मानसून के दौरान भारी बारिश और तेज हवाओं के बीच पेड़ों के उखड़ने और उनकी भारी-भरकम शाखाओं के गिरने से होने वाले जानलेवा हादसों ने गंभीर रूप ले लिया है। इन घटनाओं में कई नागरिकों की जान जा चुकी है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इस बीच मुंबई महानगरपालिका की एक बड़ी प्रशासनिक कमी सामने आई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बीएमसी का सालाना बजट रिकॉर्ड 80,952 करोड़ रुपये का है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन के पास यह पता लगाने या जांचने की कोई वैज्ञानिक तकनीक नहीं है कि मुंबई के लगभग 29.75 लाख पेड़ों में से कौन सा पेड़ अंदर से खोखला हो चुका है और कब गिर सकता है।

वर्तमान में बीएमसी का उद्यान विभाग केवल पुराने और पारंपरिक तरीके से पेड़ों का मैन्युअल निरीक्षण करता है। इस प्रक्रिया से पेड़ों की आंतरिक कमजोरी का पता लगाना संभव नहीं है। विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों के अनुसार, मुंबई में बड़े पैमाने पर पेड़ों का गिरना केवल प्राकृतिक आपदा या खराब मौसम का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे मानवीय हस्तक्षेप और बीएमसी की दोषपूर्ण नीतियां भी सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं।

शहर में सड़कों के अंधाधुंध कंक्रीटीकरण के कारण पेड़ों के तनों के आसपास की मिट्टी को सीमेंट से पूरी तरह बंद कर दिया गया है। पेड़ों की जड़ों के पास बमुश्किल दो वर्ग मीटर की खुली जगह भी नहीं छोड़ी गई है, जिससे जड़ों तक न तो ऑक्सीजन पहुंच पा रही है और न ही बारिश का पानी। इसके कारण जड़ें अंदर ही अंदर सड़कर बेहद कमजोर हो जाती हैं और पेड़ मामूली हवा के झोंकों में भी धराशायी हो जाते हैं।

सबसे अहम बात यह है कि जब बीएमसी ने मुंबई में सड़कों के कंक्रीटीकरण का महाप्रोजेक्ट शुरू किया था, तब उद्यान विभाग से कोई सलाह नहीं ली गई थी और उस समय 'ट्री अथॉरिटी' का अस्तित्व भी नहीं था। इसके अलावा, इंटरनेट और बिजली की केबल बिछाने के लिए फुटपाथों पर होने वाली बेतरतीब खुदाई के दौरान पेड़ों की मुख्य जड़ों को काट दिया जाता है। उद्यानों और पार्कों में लगे पेड़ अपेक्षाकृत सुरक्षित रहते हैं, जबकि कंक्रीट सड़कों के किनारे खड़े पेड़ ही सबसे अधिक खतरे का कारण बन रहे हैं।

मनसे और विपक्ष के बढ़ते दबाव के बाद अब बीएमसी कुछ हजार पेड़ों की डिजिटल स्कैनिंग और सर्वे कराने की बात कह रही है। हालांकि, जब तक पूरे मुंबई के पेड़ों के लिए ट्री-रडार जैसी अत्याधुनिक वैज्ञानिक प्रणालियों को अनिवार्य नहीं किया जाता, तब तक मुंबईकरों के सिर पर पेड़ों के गिरने का यह जानलेवा खतरा लगातार मंडराता रहेगा।

Pratahkal Newsroom

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