मुंबई। जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ की सुदृढ़ परंपराओं और सामाजिक एकता को सूत्रबद्ध करते हुए, तेरापंथ समाज सांताक्रुज का 33वां वार्षिक स्नेह सम्मेलन रविवार को विरार के मनोरम वातावरण में अत्यंत भव्यता और गरिमा के साथ आयोजित किया गया। इस गौरवशाली आयोजन ने न केवल समाज की एकजुटता को प्रदर्शित किया, बल्कि आध्यात्मिक चेतना और सामुदायिक सेवा के संकल्प को भी नई ऊर्जा प्रदान की। कार्यक्रम का शुभारंभ तेरापंथ समाज की विभिन्न संस्थाओं के सक्रिय सहयोग और उत्साहपूर्ण भागीदारी के साथ हुआ।

इस भव्य समारोह के मुख्य प्रायोजक स्वर्गीय कुंदनमल मेहता परिवार (कालीना-कोयल) की ओर से कमलेश मेहता रहे, जिनका समाज की ओर से भावभीनी आत्मीयता के साथ स्वागत एवं बहुमान किया गया। सम्मेलन का मुख्य आकर्षण समाज के उन विशिष्ट जनों का सम्मान रहा, जिन्होंने अपनी तपस्या, उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों और निस्वार्थ समाज सेवा के माध्यम से एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। समाज की प्रगति में निरंतर योगदान देने वाले कर्मठ व्यक्तित्व सुरेंद्र कुमार कोठारी को इस अवसर पर 'सांताक्रुज रत्न' के सर्वोच्च सम्मान से अलंकृत किया गया, जो कार्यक्रम का सबसे गौरवपूर्ण क्षण रहा।

आयोजन की सफलता में तेरापंथ युवक परिषद (तेयुप) सांताक्रुज के सदस्यों का अथक श्रम और समर्पण स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ। साथ ही, सांताक्रुज सभा, महिला मंडल, किशोर मंडल, कन्या मंडल, ज्ञानशाला परिवार और संस्कारकों के सामूहिक प्रयासों ने इस सम्मेलन को एक उत्सव का रूप दे दिया। कार्यक्रम में मनोरंजन और आपसी जुड़ाव बढ़ाने के लिए गेम्स इवेंट टीम द्वारा विभिन्न खेलकूद और रोचक प्रतियोगिताओं का सफल संचालन किया गया, जिसमें बच्चों से लेकर वृद्धों तक सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर समाज के अनेक गणमान्य पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। तेरापंथी सभा सांताक्रुज के अध्यक्ष गौतम गोखरू और महिला मंडल सांताक्रुज की अध्यक्षा हंसा हिरण ने अतिथियों का मार्गदर्शन किया। विशिष्ट अतिथियों में भारत जैन महामंडल के अध्यक्ष सी. सी. डांगी, तेरापंथी महासभा के ट्रस्टी ख्यालीलाल तातेड़, मुंबई सभा के मनोहर गोखरू, विनोद कच्छारा, बाबूलाल बाफना, अर्जुन चौधरी, संदीप कोठारी और महेश बाफना विशेष रूप से उपस्थित रहे। मंच का कुशल और प्रभावी संचालन प्रवीण कोठारी एवं शैलेष बैताला द्वारा किया गया।

शुभम नोलखा द्वारा प्रेषित सूचना के अनुसार, यह स्नेह सम्मेलन समाज के भीतर परस्पर प्रेम, विश्वास और सहयोग की भावना को और अधिक प्रगाढ़ करने में मील का पत्थर साबित हुआ है। अंततः, यह आयोजन समाज की आने वाली पीढ़ी को अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़ने के एक सफल माध्यम के रूप में संपन्न हुआ, जिसकी गूँज लंबे समय तक सांताक्रुज समाज के गलियारों में सुनाई देगी।

Pratahkal Bureau

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