मुंबई में 17,000 करोड़ रुपये के सड़क कंक्रीटीकरण प्रोजेक्ट के बावजूद मानसून में खड्डों की समस्या जारी है। 10 जून से 20 अगस्त तक बीएमसी को 8,032 शिकायतें मिलीं, जिनमें 7,829 का समाधान किया गया।

मुंबई में महानगरपालिका की ओर से सड़कों के कंक्रीटीकरण पर 17,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद मानसूनी बारिश के दौरान सड़कों पर खड्डों की समस्या बनी हुई है। पिछले दो महीनों में ही बीएमसी को शहर की सड़कों पर बने खड्डों को लेकर 8,000 से अधिक शिकायतें मिली हैं। हालांकि, बीएमसी प्रशासन का दावा है कि कंक्रीटीकरण के चलते खड्डों की संख्या में कमी आई है, लेकिन डामर वाली पुरानी सड़कों और खोदाई वाले स्थानों पर समस्या अब भी कायम है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 10 जून से 20 अगस्त 2026 की दोपहर तक बीएमसी को शहर के सभी 26 वार्डों से खड्डों से संबंधित कुल 8,032 शिकायतें प्राप्त हुईं। बीएमसी का दावा है कि इनमें से 7,829 शिकायतों का तुरंत समाधान करते हुए खड्डों की मरम्मत कर दी गई है।
तुलनात्मक रूप से देखें तो पिछले साल अगस्त के मध्य तक खड्डों की शिकायतों का आंकड़ा 8,600 के पार पहुंच गया था। इस साल सबसे अधिक शिकायतें पूर्वी उपनगरों से सामने आई हैं। भांडुप के 'एस' वार्ड में 471 शिकायतें दर्ज की गईं, जबकि मानखुर्द, देवनार और गोवंडी वाले 'एम/ईस्ट' वार्ड से 461 शिकायतें मिली हैं।
बीएमसी अधिकारियों के अनुसार, जिन सड़कों का कंक्रीटीकरण पूरा हो चुका है, वहां खड्डे पड़ने की समस्या लगभग खत्म हो गई है। वहीं, जिन रास्तों पर अभी कंक्रीटीकरण का काम चल रहा है या जहां डामर की परत मौजूद है, वहां भारी बारिश के पानी से सड़कें उखड़ रही हैं।
इसके अलावा विभिन्न उपयोगिता सेवाओं के लिए की जाने वाली केबल और पाइपलाइन की खोदाई भी सड़कों की स्थिति बिगाड़ रही है। बीएमसी प्रशासन ने नागरिकों की समस्याओं को दूर करने के लिए विशेष टीमें तैनात करने की बात कही है। प्रशासन के अनुसार, ये टीमें शिकायतें मिलने के बाद तुरंत मरम्मत कार्य में जुटी हुई हैं।
17,000 करोड़ रुपये के सड़क कंक्रीटीकरण प्रोजेक्ट के बीच मानसून में सामने आईं 8,032 शिकायतें यह दर्शाती हैं कि कंक्रीटीकरण पूरा हो चुकी सड़कों और डामर वाली तथा खोदाई प्रभावित सड़कों के बीच समस्या की स्थिति अलग बनी हुई है। बीएमसी के सामने अब बारिश के दौरान खड्डों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के साथ प्रभावित सड़कों की स्थिति सुधारने की चुनौती है।

