मुंबई बारिश: अंधेरी सबवे डूबा, पूर्व मेयर किशोरी पेडणेकर ने बीएमसी को घेरा
भारी वर्षा के बाद मुंबई के निचले इलाकों में जलजमाव, पूर्व मेयर ने नालेसफाई में भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर अधिकारियों पर कार्रवाई और कड़े ऑडिट की मांग की।

मुंबई में हुई सीजन की पहली ही जोरदार मूसलाधार बारिश ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की मानसून पूर्व तैयारियों और शत-प्रतिशत नालेसफाई के बड़े-बड़े दावों की हवा निकाल दी है। बुधवार को हुई भारी वर्षा के कारण अंधेरी सबवे समेत शहर के कई निचले इलाके पूरी तरह पानी में डूब गए, जिससे सड़कों पर गाड़ियों की आवाजाही दूभर हो गई और मुंबईकरों को भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझना पड़ा। पहली ही बारिश में महानगर की रफ्तार थमने से बीएमसी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस भारी अव्यवस्था को लेकर पूर्व मेयर और विपक्षी नेता किशोरी पेडणेकर ने बीएमसी प्रशासन तथा सत्ताधारी भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि कागजों पर करोड़ों रुपये खर्च करके नालेसफाई पूरी होने की बात कही गई थी, लेकिन पहली ही बारिश ने इस काम की जमीनी हकीकत और इसमें हुए भ्रष्टाचार को पूरी तरह उजागर कर दिया है।
जलजमाव की जमीनी स्थिति का जायजा लेने के लिए गुरुवार को पूर्व मेयर किशोरी पेडणेकर ने नगरसेवक प्रमोद सावंत और स्थानीय नागरिकों के साथ अंधेरी सबवे तथा मिलन सबवे सहित जलजमाव वाले विभिन्न संवेदनशील इलाकों का दौरा किया। निरीक्षण के बाद मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि प्रशासन भले ही सौ फीसदी से ज्यादा नालेसफाई का दावा कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत में कई बड़े नाले अब भी कचरे, प्लास्टिक और गाद से ठसाठस भरे हुए हैं, जिसके कारण बारिश के पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। उन्होंने सत्ता पक्ष और प्रशासन के बीच आपसी तालमेल की भारी कमी पर भी निशाना साधा।
पेडणेकर ने इस बात पर विशेष ध्यान दिलाया कि खुद सत्ताधारी दल के नेता भी नालेसफाई की सुस्त रफ्तार और खराब गुणवत्ता पर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि इस पूरे संवेदनशील मामले की लीपापोती करने के बजाय किए गए सभी कामों का तुरंत कड़ा ऑडिट कराया जाना चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने लापरवाही बरतने वाले और जनता के पैसों की बर्बादी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि आने वाले पूरे मानसून सीजन में मुंबई की जनता को इस तरह की नारकीय स्थिति से दोबारा न गुजरना पड़े।

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