Bandra East encroachment removal drive : देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के व्यस्ततम रेलवे गलियारों में से एक, बांद्रा ईस्ट रेलवे स्टेशन और बांद्रा टर्मिनस के पास स्थित 'गरीब नगर' इलाके में वेस्टर्न रेलवे (पश्चिमी रेलवे) का अब तक का सबसे बड़ा और आक्रामक अतिक्रमण विरोधी अभियान जारी है। बॉम्बे हाईकोर्ट के कड़े कानूनी रुख और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बाद शुरू हुआ यह पांच दिवसीय महा-अभियान अपने तीसरे दिन एक बेहद संवेदनशील और हिंसक मोड़ पर पहुंच गया। करोड़ों रुपये मूल्य की प्राइम रेलवे भूमि को खाली कराने के उद्देश्य से जब भारी-भरकम बुलडोजर और मलबे की गाड़ियां संकरी गलियों में दाखिल हुईं, तो वहां दशकों से काबिज स्थानीय निवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। देखते ही देखते पूरा इलाका रणक्षेत्र में तब्दील हो गया, जहां अतिक्रमण हटाने आई प्रशासनिक टीमों और भारी सुरक्षा बलों पर उग्र भीड़ द्वारा भारी पथराव, बर्तनों और घरेलू सामानों से हमला किया गया। इस हिंसक झड़प में सात से दस सुरक्षा अधिकारी और कई प्रदर्शनकारी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिसके बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा।

वेस्टर्न रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बांद्रा रेलवे कॉरिडोर और बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) के रणनीतिक व्यावसायिक क्षेत्र के पास स्थित करीब 5,200 वर्ग मीटर की बेहद मूल्यवान सरकारी भूमि को पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त कराना है। इस कीमती जमीन पर करीब 400 से 500 बहुमंजिला अवैध झुग्गियां और कच्चे-पक्के मकान पिछले कई सालों से खड़े थे, जिनमें से कई अवैध निर्माण तो रेलवे के ओवरब्रिज (एफओबी) की ऊंचाई को भी लांघ चुके थे, जो लोकल ट्रेनों के सुरक्षित संचालन के लिए एक बेहद गंभीर सुरक्षा जोखिम बन चुके थे। भारी विरोध, सुरक्षा बलों के साथ तीखी तकरार और कानून-व्यवस्था के गंभीर संकट के बावजूद, अभियान के दूसरे और तीसरे दिन के अंत तक प्रशासनिक अमले ने करीब 60 फीसदी से अधिक अवैध ढांचों को पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया है। विस्थापित हो रहे परिवारों में 27 मई को आने वाले त्योहार बकरीद की तैयारियों के बीच अपने आशियाने उजड़ने को लेकर गहरा आक्रोश और बेबसी देखी गई, वहीं प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सुरक्षात्मक सुरक्षा जोन का निर्माण और रेल यात्रियों की सुरक्षा समय की सबसे बड़ी मांग है।

इस पूरे प्रशासनिक और पुलिसिया एक्शन के पीछे एक लंबा और जटिल कानूनी घटनाक्रम निहित है। वेस्टर्न रेलवे ने स्पष्ट किया है कि गरीब नगर इलाके में सार्वजनिक परिसर अधिनियम (पब्लिक प्रेमाइसेस एक्ट) के तहत बेदखली की कानूनी कार्यवाही साल 2017 से पहले ही शुरू कर दी गई थी और 27 नवंबर 2017 को पहली बार निष्कासन के आदेश पारित हुए थे। इसके बाद यह मामला लगभग नौ वर्षों तक बॉम्बे हाईकोर्ट से लेकर देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के समक्ष गहन न्यायिक जांच के दायरे में रहा। अंततः, बॉम्बे हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस साल 29 अप्रैल को अपने एक ऐतिहासिक फैसले में रेलवे को बिना किसी रुकावट के इस संवेदनशील रेल सुरक्षा क्षेत्र से सभी अवैध निर्माणों को पूरी तरह ध्वस्त करने की वैधानिक अनुमति प्रदान कर दी, जिस फैसले को बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा। अदालत ने अपने आदेश में यह भी कड़ा निर्देश दिया था कि अगस्त 2021 में मुंबई रेलवे विकास कॉर्पोरेशन, एमएमआरडीए और रेलवे द्वारा संयुक्त रूप से किए गए आधिकारिक सर्वे में जो लगभग 100 परिवार वैध या पुनर्वास के पात्र पाए गए हैं, उनके हितों की पूरी सुरक्षा की जाए। प्रशासन ने इस कानूनी गाइडलाइन का पालन करते हुए पात्र परिवारों को 'मुंबई वन' परियोजना के तहत वैकल्पिक आवास मुहैया कराया है, जबकि अपात्र और किराए पर रह रहे हजारों प्रवासियों को इस भीषण गर्मी के बीच कड़े कानून के दायरे में विस्थापित होना पड़ा है।

इस वृहद भूमि और रेल गलियारे को खाली कराने के दूरगामी आर्थिक और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रभाव होने वाले हैं। वेस्टर्न रेलवे इस मुक्त कराई गई जमीन का उपयोग मुंबई सेंट्रल और सांताक्रुज के बीच बहुप्रतीक्षित पांचवीं और छठी रेलवे लाइन के विस्तार के लिए करने जा रहा है, जो लंबे समय से जमीन की कमी के कारण अधर में लटकी हुई थी। इस कॉरिडोर के पूरा होने से मुंबई की उपनगरीय (लोकल) ट्रेनों और लंबी दूरी की मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों के ट्रैक पूरी तरह अलग हो जाएंगे, जिससे बांद्रा टर्मिनस से मौजूदा 21 ट्रेनों के अतिरिक्त करीब 50 नई ट्रेनें चलाई जा सकेंगी और हर दिन यात्रा करने वाले लाखों मुंबईकरों को भीड़भाड़ तथा लेट-लतीफी से हमेशा के लिए बड़ी निजात मिलेगी। कानून-व्यवस्था को पूरी तरह नियंत्रण में रखने के लिए मौके पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF), राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) और मुंबई पुलिस के 1,000 से अधिक सशस्त्र जवानों को तैनात रखा गया है तथा बीएमसी स्काईवॉक और फुट ओवरब्रिजों को पूरी तरह सील कर दिया गया है। रेलवे प्रशासन ने साफ किया है कि खाली कराई गई इस बेशकीमती जमीन पर दोबारा अवैध कब्जा रोकने के लिए आगामी 23 मई तक पूरी भूमि की कंक्रीट फेंसिंग (घेराबंदी) का काम अनिवार्य रूप से पूरा कर लिया जाएगा, जो यह स्पष्ट करता है कि अब मुंबई के बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और सार्वजनिक सुरक्षा के आगे किसी भी प्रकार का अवैध दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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