मुंबई। विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर मुंबई की महापौर रितू तावड़े ने बीएमसी की ‘मुंबई रेबीज उन्मूलन परियोजना’ के दूसरे चरण की शुरुआत की। भायखला स्थित रानी बाग यानी वीरमाता जिजाबाई भोसले उद्यान में आयोजित कार्यक्रम में महापौर ने घोषणा की कि बीएमसी के सभी 24 वार्डों में विशेष रूप से प्रशिक्षित कर्मचारियों के साथ अलग से रेबीज क्लिनिक शुरू किए जाएंगे।

इन क्लिनिकों में कुत्ते के काटने पर दी जाने वाली एंटी-रेबीज वैक्सीन और त्वरित इलाज की 24 घंटे मुफ्त सुविधा उपलब्ध रहेगी। महापौर रितू तावड़े ने बीएमसी के पशु चिकित्सा विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए बताया कि वर्ष 2025 में मुंबई में रेबीज से एक भी मौत दर्ज नहीं हुई है। इसे उन्होंने एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।

बीएमसी ने वर्ष 2027 तक मुंबई को रेबीज-नियंत्रित क्षेत्र बनाने और वर्ष 2030 तक रेबीज से होने वाली मौतों को शून्य पर लाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए मुंबई के प्रत्येक बीएमसी वार्ड में आवारा कुत्तों को पकड़ने और उनके इलाज के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस अलग गाड़ियां तैनात की जाएंगी।

अभियान के तहत बीएमसी के ‘हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे आपला दवाखाना’ केंद्रों पर भी रेबीज से बचाव के टीकों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। ये निर्देश अतिरिक्त आयुक्त प्राजक्ता वर्मा ने दिए हैं।

‘मुंबई रेबीज उन्मूलन परियोजना’ के दूसरे चरण में अगले तीन वर्षों तक हर साल 55 हजार से 60 हजार आवारा कुत्तों के टीकाकरण का लक्ष्य तय किया गया है। इसके साथ ही रेबीज से बचाव को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए बीएमसी स्कूलों के 5 लाख छात्रों और 5 हजार शिक्षकों तक पहुंचने की योजना बनाई गई है।

मुंबई की लोकल ट्रेनों और स्टेशनों पर भी पोस्टर तथा विज्ञापनों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाएगा। बीएमसी के इस अभियान का उद्देश्य निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप मुंबई को पूरी तरह रेबीज-मुक्त और सुरक्षित बनाने की दिशा में आगे बढ़ाना है।

Pratahkal Newsroom

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