मुंबई की राजनीति में एक बार फिर बड़े उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं, जिसने गलियारों में हलचल मचा दी है। शिवसेना (शिंदे गुट) के गटनेता अमेय घोले के नेतृत्व में एक बेहद गोपनीय और रणनीतिक अभियान चलाया जा रहा है, जिसे 'ऑपरेशन टाइगर' का नाम दिया गया है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे गुट के लगभग 45 पूर्व नगरसेवक वर्तमान में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के सीधे संपर्क में हैं। माना जा रहा है कि दिसंबर 2026 तक इस राजनीतिक अभियान को निर्णायक मोड़ दिया जाएगा।

ठाकरे गुट के इन पूर्व नगरसेवकों में लंबे समय से व्याप्त नाराजगी और अपने क्षेत्रों में प्रशासनिक उपेक्षा की शिकायतों को शिंदे सेना ने एक अवसर के रूप में देखा है। इस असंतोष को भांपते हुए शिंदे गुट ने अपनी राजनीतिक बिसात बिछा दी है। योजना के प्रथम चरण में इन 45 पूर्व नगरसेवकों को पार्टी में शामिल कर ठाकरे गुट को बीएमसी में एक बड़ा और करारा झटका देने की तैयारी है। कानूनी जटिलताओं से बचने और दलबदल को पूर्णतः वैध बनाने के लिए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे 'टू-थर्ड' (दो-तिहाई) फॉर्मूले पर विशेष रूप से काम कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इस पर कोई कानूनी संकट उत्पन्न न हो।

पिछले काफी समय से बीएमसी के कई पूर्व नगरसेवक विकास कार्यों के लिए फंड की कमी और अपने कार्यक्षेत्रों की अनदेखी को लेकर आंतरिक रूप से परेशान थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि 'ऑपरेशन टाइगर' दिसंबर 2026 तक पूर्ण रूप से सफल होता है, तो आगामी बीएमसी चुनावों से ठीक पूर्व मुंबई की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। यह कदम ठाकरे गुट के लिए अपने सबसे मजबूत गढ़ पर से नियंत्रण खोने के रूप में देखा जा रहा है। इस संभावित बगावत ने मुंबई की राजनीति में भारी हलचल पैदा कर दी है, जिस पर अब सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

Pratahkal Newsroom

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