मुंबई: मेवाड़ की धरा पर इतिहास रचने को तैयार पडासली नाकोड़ा धाम, जाजम मुहूर्त में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
मुंबई के गोरेगांव में पडासली नाकोड़ा धाम के अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव हेतु 'जाजम मुहूर्त' का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। मेवाड़ में स्थापित हो रही विश्व की सबसे ऊँची 36 फीट की श्रीनाकोड़ा भैरव प्रतिमा और 29 अप्रैल 2026 को होने वाले महा-प्रतिष्ठा महोत्सव की पूरी जानकारी। जानें कैसे दानदाताओं और कार्यकर्ताओं के सहयोग से पडासली बन रहा है अद्वितीय जैन तीर्थ।

मुंबई। आर्थिक राजधानी के गोरेगांव स्थित मेवाड़ भवन में रविवार को भक्ति और उत्साह का एक ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने आने वाले समय में मेवाड़ की पुण्य धरा पर लिखे जाने वाले एक स्वर्णिम अध्याय की नींव रख दी। राजसमंद जिला मुख्यालय के समीप पडासली में निर्माणाधीन 'श्रीनाकोड़ा पारसनाथ तीर्थ' के अंजनशलाका प्रतिष्ठा महोत्सव के निमित्त आयोजित 'जाजम मुहूर्त' न केवल धार्मिक दृष्टि से भव्य रहा, बल्कि इसने सामाजिक एकता और ऐतिहासिक महत्ता की नई परिभाषा गढ़ी। 29 अप्रैल 2026 को होने वाले इस महाकुंभ की गूंज अब संपूर्ण जैन समाज और धर्मप्रेमियों के बीच स्पष्ट सुनाई दे रही है।
पडासली का यह आगामी तीर्थ विश्व पटल पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाने जा रहा है, क्योंकि यहाँ श्रीनाकोड़ा भैरव देव की 36 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित की जा रही है, जो विश्व की सबसे ऊंची भैरव प्रतिमा के रूप में विख्यात होगी। कार्यक्रम का शुभारंभ गुरुभगवंतों के ओजस्वी सानिध्य में हुआ। ज्ञानहंस विजय महाराज साहेब एवं 5 ठाणा के साथ गुरुदेवों का शोभायात्रा के साथ मंगल प्रवेश हुआ, जहाँ उपस्थित श्रद्धालुओं ने गगनभेदी जयकारों के साथ उनका स्वागत किया। नाकोड़ा धाम सेवा संस्थान के महामंत्री मनोज जैन ने परियोजना की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि मेवाड़ की धरा पर एक आध्यात्मिक शक्ति केंद्र का उदय है।
भक्तिमय संगीत की लहरों के बीच आयोजित इस जाजम मुहूर्त में दानदाताओं और लाभार्थियों का उत्साह देखते ही बनता था। संगीतकार अनिल सालेचा की स्वर लहरियों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया, जिसके बीच तीर्थ की विभिन्न इकाइयों के लिए बोलियां लगाई गईं। इस दौरान प्रतिदिन स्वामीवात्सल्य, फलेचुंदड़ी, शाही करबा, वाराणसी नगरी, भरत चक्रवर्ती भोजन खंड, पुरुषों के लिए नाकोड़ा नगरी आवास, महिलाओं के लिए पद्मावती नगरी विश्राम कक्ष, और अंजनशलाका क्रिया हेतु श्री पार्श्व भैरव मंडपम् जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं के लिए लाभार्थियों ने बढ़-चढ़कर अपनी सहभागिता दर्ज कराई। इसके अतिरिक्त धर्मशाला की प्रथम बिल्डिंग का उद्घाटन, चाय पर चर्चा कक्ष, तपस्वी खंड, अभिनंदन खंड (स्वागत कक्ष), और प्रतिष्ठा के दौरान ड्रोन द्वारा पुष्पवर्षा जैसे आधुनिक व पारंपरिक आयोजनों के लिए भी समाज के प्रबुद्ध जनों ने अपनी सेवाएं समर्पित कीं। संस्थान द्वारा सभी लाभार्थियों का तिलक, दुपट्टा, श्रीफल, मोमेंटो, साफा और चुंदड़ी के साथ भव्य बहुमान किया गया।
इस आध्यात्मिक अवसर पर गुरुदेव ने अपने उद्बोधन में श्रीनाकोड़ा भैरवनाथ को जागृत देव बताते हुए कहा कि मेवाड़ जैसी वीरभूमि पर उनकी इतनी विशाल प्रतिमा की स्थापना होना पूरे क्षेत्र के सौभाग्य का प्रतीक है। ट्रस्ट से जुड़े लाल बहादुर जैन ने ऐतिहासिक जानकारी साझा करते हुए बताया कि आगामी 29 अप्रैल 2026 को श्रीनाकोड़ा पारसनाथ प्रभु, श्रीनाकोड़ा भैरव देव, श्रीमणिभद्र वीर, श्रीपद्मावती देवी एवं श्रीजितेंद्र सूरीश्वर मसा आदि प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा संपन्न होगी। इस विराट लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए लगभग एक हजार कार्यकर्ता अहर्निश सेवा में समर्पित हैं।
इस गौरवशाली आयोजन को सफल बनाने में अध्यक्ष निरंजन जैन, महामंत्री मनोज जैन, सोहन कोठारी, योगेन्द्र पुनमिया, केतन मादरेचा, लादूलाल बाफना, दिनेश पूनमिया, लाल बहादुर पुनमिया, महेंद्र पुनमिया, शांतिलाल मेहता, सुभाष बड़ाला, महेश कोठारी, हेमंत कोठारी, गुरु प्रताप एवं रमेश कुकड़ा सहित पूरी टीम का अथक परिश्रम और विजन स्पष्ट दिखाई दिया। यह जाजम मुहूर्त उस भव्यता की पहली झलक है, जो 2026 में पडासली की धरती पर एक वैश्विक तीर्थ के रूप में साकार होने वाली है।

Pratahkal Bureau
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