मुंबई में 2,200 अतिरिक्त एनआईसीयू बेड की मांग तेज, बीएमसी स्थायी समिति में नवजात स्वास्थ्य सुविधाओं पर गंभीर चिंता
मुंबई में नवजात शिशुओं के लिए 2,200 अतिरिक्त एनआईसीयू बेड की मांग बीएमसी स्थायी समिति में उठी। अस्पतालों में बेड और स्टाफ की कमी पर गंभीर चिंता जताई गई।

मुंबई में नवजात शिशुओं के उपचार के लिए उपलब्ध एनआईसीयू (नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट) बेड की भारी कमी का मुद्दा बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की स्थायी समिति की बैठक में प्रमुखता से उठा। विभिन्न दलों के सदस्यों ने कहा कि मुंबई जैसे बड़े महानगर में वर्तमान समय में लगभग 2,200 एनआईसीयू बेड की आवश्यकता है, जबकि बीएमसी के अस्पतालों में फिलहाल केवल करीब 300 बेड ही उपलब्ध हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सदस्यों ने स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार करने, नए एनआईसीयू बेड शुरू करने तथा डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को शीघ्र दूर करने की मांग की।
बैठक में शिवाजी नगर स्थित प्रसूति गृह के ठेकेदार के अनुबंध विस्तार से संबंधित प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से सामने आया। स्थायी समिति सदस्य जमीर कुरैशी ने कहा कि शिवाजीनगर-गोवंडी प्रसूति गृह में पर्याप्त स्थान उपलब्ध होने के बावजूद केवल 20 एनआईसीयू बेड ही संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की भारी कमी के कारण नवजात शिशुओं को समय पर आवश्यक उपचार नहीं मिल पाता। उन्होंने स्थायी समिति से अस्पताल का दौरा कर जमीनी स्थिति का निरीक्षण करने की मांग भी की।
स्थायी समिति सदस्य डॉ. सईदा खान ने कहा कि बीएमसी के प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में हालात इतने गंभीर हैं कि कई बार एक ही बेड पर दो-दो नवजात शिशुओं को रखना पड़ता है। उन्होंने कुर्ला स्थित भाभा अस्पताल का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां केवल आठ एनआईसीयू बेड उपलब्ध हैं, जो क्षेत्र की आबादी के अनुपात में बेहद कम हैं।
कांग्रेस दल के नेता अशरफ आजमी ने मांग की कि एनआईसीयू जैसी संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन किसी निजी एजेंसी को सौंपने के बजाय बीएमसी स्वयं करे। वहीं प्रकाश दरेकर और गणेश खणकर ने कहा कि नवजात शिशुओं में बढ़ रही गंभीर बीमारियों को देखते हुए एनआईसीयू अब बुनियादी स्वास्थ्य सेवा का हिस्सा बन चुका है, इसलिए बच्चों के लिए समर्पित विशेष अस्पताल स्थापित किए जाने चाहिए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त नगर आयुक्त प्राजक्ता वर्मा लवंगारे ने आश्वासन दिया कि शिवाजीनगर प्रसूति गृह सहित अन्य अस्पतालों की विस्तृत रिपोर्ट अगली स्थायी समिति बैठक में प्रस्तुत की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्टाफ भर्ती की प्रक्रिया पूरी कर स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
बैठक के अंत में स्थायी समिति अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने प्रशासन को सदस्यों द्वारा दिए गए सुझावों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए और संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की।

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