ढाई साल बाद मुंबई महानगरपालिका में शिवसेना का महापौर? महायुति में नया सियासी समीकरण
मुंबई महानगरपालिका में महापौर पद के ढाई-सवा साल के फार्मूले पर नया सियासी मोड़, उबाठा नगरसेवकों के संभावित बदलाव से समीकरण बदलने के संकेत।

मुंबई महानगरपालिका में साढ़े चार साल के लंबे प्रशासक काल के बाद चुनाव संपन्न हो गया है और महायुति को स्पष्ट बहुमत हासिल हुआ है। चुनाव परिणामों में भाजपा के 88 नगरसेवक, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के 28 नगरसेवक और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 3 नगरसेवक चुनकर आए हैं।
नतीजों के बाद हुई महायुति की समन्वय समिति की बैठक में महापौर पद के कार्यकाल को लेकर बड़ा फैसला लिए जाने की खबर है। सहमति के मुताबिक, शुरुआती ढाई साल के लिए भाजपा का महापौर रहेगा। इसके बाद अगले सवा साल के लिए शिवसेना का महापौर पद पर कब्जा रहेगा। कार्यकाल के अंतिम सवा साल में दोबारा भाजपा का महापौर बनेगा।
इसी फार्मूले के तहत वर्तमान में भाजपा की रितु तावड़े को महापौर और संजय घाड़ी को उपमहापौर नियुक्त किया गया है। हालांकि, आने वाले समय में मुंबई के राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना बनी हुई है।
राज्य में शिवसेना की ओर से ‘मिशन टाइगर’ चलाया जा रहा है। इसके तहत शिवसेना उबाठा गुट के नगरसेवकों को अपने पाले में लाने की तैयारी की जा रही है। शिवसेना के समूह नेता अमेय घोले ने संकेत दिए हैं कि मनपा में भी यह रणनीति लागू की जाएगी।
अगर उबाठा गुट के नगरसेवक शिंदे गुट में शामिल होते हैं, तो शिवसेना की सदस्य संख्या बढ़ जाएगी। ऐसी स्थिति में शिंदे गुट भाजपा पर महापौर पद के कार्यकाल को और बढ़ाने का दबाव बना सकता है।
फिलहाल आगे की रणनीति को लेकर बीएमसी और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। नगरसेवकों की संख्या में संभावित बदलाव के बीच महायुति के भीतर महापौर पद के मौजूदा फार्मूले पर भी राजनीतिक नजरें टिक गई हैं।

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