मुंबई में पेड़ों के गिरने के पीछे बड़ा खुलासा, गलत छंटनी और रोड कंक्रीटीकरण पर जांच रिपोर्ट ने उठाए सवाल
मुंबई में पेड़ों के गिरने की जांच रिपोर्ट में गलत छंटनी और रोड कंक्रीटीकरण को हादसों की बड़ी वजह बताया गया। अब दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी।

मुंबई में मानसून के दौरान पेड़ों के गिरने से होने वाले हादसों को लेकर एक उच्च स्तरीय जांच रिपोर्ट ने मुंबई महानगरपालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुक्रवार को अतिरिक्त कमिश्नर अविनाश ढाकने को सौंपी गई इस रिपोर्ट में पेड़ों की छंटनी की पद्धति और सड़कों के कंक्रीटीकरण को हादसों की बड़ी वजह बताया गया है। मनपा सूत्रों से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, रिपोर्ट के आधार पर अब जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है और लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है।
जांच में शामिल वृक्ष विशेषज्ञों ने अपनी विशेष राय में कहा है कि विदेशों में पेड़ों की छंटनी आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से की जाती है, जबकि मुंबई में इसके ठीक विपरीत प्रक्रिया अपनाई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशों में पेड़ों को बीच से इस तरह काटा जाता है कि उनकी शाखाएं नीचे की ओर फैलकर पर्याप्त छाया बनाए रखें। इससे तेज हवा के दबाव में भी पेड़ का संतुलन बना रहता है और उसके गिरने की आशंका कम होती है। इसके उलट मुंबई में नीचे की हरी-भरी शाखाओं को ही काट दिया जाता है, जिससे पेड़ केवल ऊपर की ओर बढ़ता है और तेज हवा चलने पर असंतुलित होकर गिर जाता है।
विस्तृत जांच रिपोर्ट में एक हालिया हादसे का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, दुर्घटना का कारण बना पीपल का पेड़ करीब 60 वर्ष पुराना और काफी विशाल था, जिसका एक बड़ा हिस्सा फुटपाथ और मुख्य सड़क की ओर झुका हुआ था। जांच में सामने आया कि मुंबई में बड़े पैमाने पर चल रहे सड़क कंक्रीटीकरण कार्य के दौरान पेड़ की जड़ों के चारों ओर सीमेंट का पक्का ढांचा बना दिया गया था। इसके कारण जड़ों तक न तो पर्याप्त पानी पहुंच पा रहा था और न ही आवश्यक ऑक्सीजन मिल रही थी। लगातार पोषण नहीं मिलने से जड़ें भीतर ही भीतर कमजोर और खोखली होती गईं, जिसके चलते अंततः वह भारी-भरकम पेड़ अचानक सड़क पर गिर गया।
रिपोर्ट में भविष्य के लिए कई महत्वपूर्ण और कड़े दिशानिर्देश भी सुझाए गए हैं। जांच समिति ने सिफारिश की है कि मुंबई के सभी पेड़ों के चारों ओर किए गए कंक्रीटीकरण को तत्काल हटाकर वहां प्राकृतिक मिट्टी डाली जाए, ताकि जड़ों तक पानी और ऑक्सीजन आसानी से पहुंच सके। इसके साथ ही पेड़ों के आसपास किसी भी प्रकार की खुदाई, ड्रिलिंग या अन्य निर्माण कार्य करते समय विशेष सावधानी बरतने के निर्देश देने की भी सिफारिश की गई है।
समिति ने यह भी कहा है कि यदि किसी विकास कार्य या लापरवाही के कारण पेड़ों को नुकसान पहुंचता है तो संबंधित निजी ठेकेदार के खिलाफ सीधे दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। वृक्ष विशेषज्ञों की सलाह पर तैयार इस रिपोर्ट के आधार पर बीएमसी अब जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी और लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों पर जल्द कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।

Pratahkal Bureau
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