मुंबई मानसून तैयारी: साकीनाका-कुर्ला चोक पॉइंट्स पर फोकस
बीएमसी ने जलजमाव रोकने के लिए नालों की सफाई, गाद हटाने का लक्ष्य बदला और मिठी नदी के हिस्सों में काम तेज किया

मुंबई। मानसून की आहट के साथ ही मुंबई महानगरपालिका ने शहर को जलजमाव से बचाने के लिए व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। इस वर्ष बीएमसी ने अपनी रणनीति को और अधिक लक्षित करते हुए उन विशिष्ट ‘चोक पॉइंट्स’ पर फोकस बढ़ाया है, जो हर साल भारी बारिश के दौरान बाढ़ की स्थिति पैदा करते हैं।
प्रशासन ने विशेष रूप से साकीनाका और कुर्ला जैसे इलाकों की पहचान की है, जहां नालों में कचरा फंसने की समस्या सबसे अधिक सामने आती है। अतिरिक्त नगर आयुक्त अभिजीत बांगर के अनुसार, अंधेरी और साकीनाका में कई नाले पारंपरिक कल्वर्ट से ढके हुए हैं, जिससे मशीनों का वहां तक पहुंचना कठिन हो जाता है। इस चुनौती से निपटने के लिए अब इन क्षेत्रों में मैन्युअल मशीनों के माध्यम से प्लास्टिक और ठोस कचरा निकाला जा रहा है, ताकि पानी का प्रवाह बाधित न हो और जलभराव की स्थिति से बचाव किया जा सके।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस वर्ष बीएमसी ने गाद निकालने के लक्ष्य में भी बदलाव किया है। इस बार कुल 8.41 लाख मीट्रिक टन गाद निकालने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें से 1.32 लाख मीट्रिक टन गाद केवल मिठी नदी से हटाई जाएगी। बांगर ने स्पष्ट किया कि लक्ष्य को कम करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ठेकेदारों को केवल वास्तविक गाद के लिए ही भुगतान किया जाए, न कि तैरते हुए कचरे या मलबे के लिए।
इसके अतिरिक्त, 18 किलोमीटर लंबी मिठी नदी को तीन हिस्सों में विभाजित कर सफाई कार्य किया जा रहा है। बीकेसी और माहिम जैसे क्षेत्रों में नदी का पाट अपेक्षाकृत चौड़ा है और मैंग्रोव की मौजूदगी से प्राकृतिक लाभ मिलता है, लेकिन प्रशासन के अनुसार समय पर सफाई कार्य पूरा करना ही बाढ़ से बचाव की सबसे महत्वपूर्ण शर्त है।
इस बीच, भाजपा विधायक संजय उपाध्याय द्वारा ठेकेदारों पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। आरोपों के बाद प्रशासन ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे पूरे अभियान की पारदर्शिता और जवाबदेही पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
मानसून से पहले की यह कवायद न केवल शहर को जलजमाव से बचाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता की परीक्षा भी है, जिसका प्रभाव सीधे मुंबई की लाखों आबादी पर पड़ेगा।

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