मुंबई मेट्रो लाइन 9: 'डेथ ट्रैप' या इंजीनियरिंग का कमाल? गोल्डन नेस्ट विवाद पर MMRDA की सफाई
मुंबई मेट्रो लाइन 9 के तहत गोल्डन नेस्ट सर्कल पर बने ₹6,607 करोड़ के 'डबल-डेकर' फ्लाइओवर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। संकरी लेन के कारण 'डेथ ट्रैप' कहे जाने वाले इस ढांचे पर MMRDA ने सफाई देते हुए सुरक्षा इंतजामों का दावा किया है। जानें इस प्रोजेक्ट की डिजाइन सच्चाई और फरवरी में होने वाले इसके संभावित उद्घाटन से जुड़ी पूरी रिपोर्ट।

Mumbai Metro Line 9
Golden Nest Circle Mumbai Metro Line 9 : मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली मेट्रो सेवा के विस्तार के बीच मीरा-भायंदर क्षेत्र में एक अनोखा इंजीनियरिंग प्रयोग चर्चा और विवाद दोनों का विषय बन गया है। मुंबई मेट्रो लाइन 9 के अंतर्गत गोल्डन नेस्ट सर्कल के पास बने 'डबल-डेकर' ढांचे को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। ₹6,607 करोड़ की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के एक हिस्से को आलोचकों ने 'डेथ ट्रैप' (मौत का जाल) करार दिया है, जिसके बाद मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (MMRDA) को रक्षात्मक रुख अपनाते हुए स्पष्टीकरण जारी करना पड़ा है।
इंजीनियरिंग का कमाल या डिजाइन की चूक ?
गोल्डन नेस्ट सर्कल के पास बना यह स्ट्रक्चर आधुनिक शहरी नियोजन का एक अनूठा उदाहरण है, जहां एक ही पिलर पर नीचे सड़क यातायात (फ्लाइओवर) और ऊपर मेट्रो की पटरियां बिछाई गई हैं। विवाद की मुख्य वजह फ्लाइओवर का अचानक संकरा होना है।
- लेन का विलय: फ्लाइओवर पर 2+2 लेन का रास्ता अचानक 1+1 लेन में सिमट जाता है, जिसे लेकर वाहन चालकों ने दुर्घटना की आशंका जताई है।
- MMRDA का तर्क: आधिकारिक स्पष्टीकरण में कहा गया है कि यह डिजाइन स्थानीय विकास योजना (DP) के अनुरूप है। 'राइट ऑफ वे' (सड़क की चौड़ाई) की सीमाओं के कारण इसे वर्तमान में संकरा रखा गया है, लेकिन भविष्य में विस्तार की गुंजाइश छोड़ी गई है।
- सुरक्षा उपाय: जनता के डर को देखते हुए प्रशासन ने यहां रंबल स्ट्रिप्स, स्पष्ट साइनबोर्ड और सुरक्षा बैरियर जैसे इंतजाम किए हैं ताकि गति नियंत्रित रहे।
परियोजना का महत्व और आगामी समय सीमा :
मेट्रो लाइन 9 न केवल मीरा-भायंदर को मुंबई के उपनगरों से जोड़ेगी, बल्कि पश्चिमी एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक के बोझ को भी काफी कम करेगी। ₹6,607 करोड़ की लागत वाली यह परियोजना अब अपने अंतिम चरण में है। वर्तमान में इस खंड पर तकनीकी परीक्षण (Trials) जोरों पर हैं। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो फरवरी 2026 तक इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
