मुंबई महानगरपालिका की मासिक सभा में एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिला। सदन में हुए हंगामे के बाद विपक्षी पार्षदों ने एकजुट होकर सभा का बहिष्कार कर दिया। विपक्ष का आरोप है कि सत्ताधारी दल के पास सदन में जरूरी बहुमत नहीं है और इसी वजह से वह जनता से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा से बचने की कोशिश कर रहा है।

मामले की शुरुआत चेंबूर में हुई एक हालिया दुर्घटना की रिपोर्ट को लेकर हुई। विपक्षी सदस्यों ने मांग की कि दुर्घटना की रिपोर्ट पर पॉइंट ऑफ ऑर्डर के तहत तत्काल विस्तृत चर्चा कराई जाए। हालांकि, महापौर ने विपक्ष की इस मांग को स्वीकार नहीं किया और पहले से तय नियमित कामकाज को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

इसके बाद प्रशासन की ओर से धारावी बेस्ट डिपो के विवादास्पद प्रस्ताव और आरे कॉलोनी में होने वाले विकास कार्यों को ‘त्वरित कामकाज’ की सूची में शामिल कर चर्चा के लिए रखा गया। विपक्षी सदस्यों ने इसका विरोध करते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन जनसुरक्षा से जुड़े गंभीर हादसों पर चर्चा करने के बजाय केवल व्यावसायिक और वित्तीय लाभ से जुड़े प्रस्तावों को प्राथमिकता दे रहा है।

विवाद उस समय और बढ़ गया, जब इन विकास प्रस्तावों को मंजूरी देने के लिए मतदान की स्थिति बनी। नियमों के अनुसार, ऐसे प्रस्तावों को पारित करने के लिए सत्ताधारी दल के पास दो-तिहाई बहुमत होना जरूरी था। लेकिन बहुमत साबित करने के लिए मतदान की प्रक्रिया शुरू होते ही सत्ता पक्ष की स्थिति कमजोर दिखाई देने लगी।

स्थिति को देखते हुए महापौर ने आनन-फानन में मतदान का फैसला रद्द कर दिया और इस विषय पर दोबारा विशेष सभा आयोजित करने की घोषणा कर दी। सत्ता पक्ष के इस निर्णय से नाराज विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

विपक्ष ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल मुंबईकरों की सुरक्षा और जानमाल से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज कर रहा है और विकास कार्यों की आड़ में केवल वित्तीय हितों वाले प्रस्तावों को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। मुंबई महानगरपालिका की इस सभा में बहुमत और जनहित के मुद्दों को लेकर बढ़ा राजनीतिक टकराव अब नए विवाद का केंद्र बन गया है।

Pratahkal Newsroom

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