मुंबई: गोल्ड ट्रेडिंग के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश, 7 शातिर गिरफ्तार
मीरा भाईंदर वसई विरार पुलिस की क्राइम ब्रांच यूनिट 4 ने मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर रेड कर गोल्ड और फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह के 7 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह मैट्रिमोनियल साइट्स के जरिए लोगों को निवेश का झांसा देकर शिकार बनाता था। इस गिरोह पर देश भर में 51 साइबर मामले दर्ज हैं।

मुंबई। निवेश के नाम पर रातों-रात अमीर बनने का सपना दिखाने वाले जालसाजों के खिलाफ मीरा भाईंदर वसई विरार (MBVV) पुलिस आयुक्तालय की क्राइम ब्रांच यूनिट 4 ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो फॉरेक्स और गोल्ड ट्रेडिंग के मायाजाल में मासूम लोगों को फंसाकर उनकी जीवनभर की कमाई डकार जाता था। इस मामले में पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके तार देश के कई राज्यों से जुड़े हुए हैं।
इस सनसनीखेज कार्रवाई की पटकथा 12 नवंबर 2025 को लिखी गई, जब क्राइम ब्रांच यूनिट 4 के पुलिस निरीक्षक (PI) प्रमोद बड़ाख को मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर स्थित 'शिवसाई रेजीडेंसी लॉजिंग एंड बोर्डिंग' में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली। पुलिस टीम ने जब वहां छापेमारी की, तो ऑनलाइन ठगी के एक संगठित साम्राज्य का खुलासा हुआ। मौके से रोशन कुमार सीताराम शेट्टी, साबिर मोहम्मद खान, सनद संजीव दास, राहुलकुमार उर्फ कैलाश राकेशकुमार और आमिर करम शेर खान सहित गिरोह के अन्य सदस्यों को हिरासत में लिया गया। यह गिरोह तकनीकी रूप से इतना सक्षम था कि वह लोगों को अवैध ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए ऊंचे मुनाफे का लालच देकर अपने जाल में फंसाता था।
पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि यह गिरोह शिकार खोजने के लिए मैट्रिमोनियल साइट्स और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का सहारा लेता था। ठग पहले लोगों से दोस्ती कर उनका विश्वास जीतते थे और फिर उन्हें गोल्ड एवं फॉरेक्स ट्रेडिंग में निवेश कर कुछ ही दिनों में लखपति बनने का झांसा देते थे। जब पीड़ित इनके झांसे में आकर निवेश करना शुरू करते, तो यह गिरोह उन पैसों को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर देता और फिर नकद निकासी कर उसे अपने निजी ऐशो-आराम पर खर्च करता था।
कमिश्नर निकेत कौशिक, डीसीपी संदीप दोईफोड़े और एसीपी मदन बल्लार के कुशल मार्गदर्शन में की गई इस जांच में यह भी पता चला है कि इस गिरोह का नेटवर्क देशभर में फैला हुआ है। आरोपियों के खिलाफ विभिन्न राज्यों में साइबर अपराध के कुल 51 मामले दर्ज हैं। पिछले महज एक साल के भीतर इस गिरोह ने करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया है। नायगांव पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज होने के बाद पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सहयोगियों और वित्तीय लेनदेन की गहराई से पड़ताल कर रही है। पुलिस की इस मुस्तैदी ने न केवल एक बड़े सिंडिकेट को ध्वस्त किया है, बल्कि भविष्य में होने वाली करोड़ों की ठगी को भी समय रहते रोक दिया है।

Pratahkal Bureau
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