मुंबई। मुंबई पुलिस ने पश्चिमी उपनगर गोरेगांव से एक हाई-टेक ठगी का बड़ा खुलासा किया है। अपराध शाखा ने यहां चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारकर 13 लोगों को गिरफ्तार किया। आरोपी अमेरिकी नागरिकों को कंप्यूटर एंटी-वायरस सॉफ्टवेयर के नवीनीकरण के नाम पर ठग रहे थे। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह कॉल सेंटर पिछले दो साल से सक्रिय था और ऑनलाइन धोखाधड़ी के जरिए भारी रकम इकट्ठा कर रहा था।

अपराध का खुलासा-

मुंबई पुलिस को कुछ दिन पहले सूचना मिली कि गोरेगांव पूर्व के एक कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में संचालित कॉल सेंटर से विदेशी नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है। अपराध शाखा की टीम ने जब यहां छापा मारा, तो मौके से 13 लोग पकड़े गए। इनमें कॉल सेंटर के दो मालिक, एक प्रबंधक और 10 एजेंट शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार, यह कॉल सेंटर तकनीकी सहायता का दिखावा करता था। यहां से अमेरिकी नागरिकों को लगातार ई-मेल भेजे जाते थे। ई-मेल में बताया जाता था कि उनका एंटी-वायरस सॉफ्टवेयर जल्द ही खत्म होने वाला है और इसे नवीनीकृत करना जरूरी है। साथ ही एक टोल-फ्री नंबर भी दिया जाता था।

ठगी का तरीका-

पुलिस जांच में सामने आया कि जैसे ही अमेरिकी नागरिक इस टोल-फ्री नंबर पर कॉल करते थे, कॉल सेंटर में बैठे एजेंट उन्हें डराते थे कि बिना नवीनीकरण के उनके कंप्यूटर का डेटा असुरक्षित हो सकता है। इसके बाद उनसे कहा जाता था कि वे 250 से 500 अमेरिकी डॉलर मूल्य के गिफ्ट कार्ड खरीदें।

आरोपी पीड़ितों से प्राप्त गिफ्ट कार्ड की जानकारी लेकर उसका उपयोग करते और फिर उसे क्रिप्टोकरेंसी में बदल देते थे। इस तरीके से पिछले दो सालों में लाखों डॉलर की रकम वसूली गई। पुलिस का मानना है कि यह संगठित गिरोह न केवल मुंबई बल्कि विदेशों तक फैला हुआ हो सकता है।

पीड़ितों का आरोप-

अमेरिकी नागरिकों से प्राप्त शिकायतों के आधार पर ही यह कार्रवाई संभव हो सकी। कई पीड़ितों ने आरोप लगाया था कि उन्हें बार-बार धमकी भरे ई-मेल आते थे और कहा जाता था कि यदि उन्होंने समय पर सॉफ्टवेयर का नवीनीकरण नहीं किया तो उनका सिस्टम हैक हो सकता है।

कुछ मामलों में एजेंट्स ने पीड़ितों से बैंकिंग डिटेल्स साझा करने की भी कोशिश की। हालांकि अधिकांश मामलों में ठगी गिफ्ट कार्ड और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए ही की गई। अमेरिकी जांच एजेंसियों से मिली सूचनाओं ने भी मुंबई पुलिस को इस गिरोह तक पहुंचने में मदद की।

पुलिस की कार्यवाही-

अपराध शाखा की टीम ने मौके से बड़ी संख्या में कंप्यूटर, मोबाइल फोन, कॉलिंग उपकरण और ठगी से संबंधित दस्तावेज जब्त किए हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि गिरोह का नेटवर्क कितने देशों तक फैला हुआ है।

गिरफ्तार किए गए 13 आरोपियों में से दो मुख्य संचालक बताए जा रहे हैं, जिन्होंने इस कॉल सेंटर की स्थापना की थी। इनके साथ ही एक प्रबंधक और कॉल करने वाले 10 एजेंट भी पकड़े गए हैं। पुलिस का मानना है कि कॉल सेंटर से जुड़े और भी लोग फरार हो सकते हैं और उनकी तलाश की जा रही है।

कानूनी प्रावधान और मामला दर्ज-

पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। इनमें धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और दूरसंचार अधिनियम की धाराओं को भी जोड़ा गया है।

गिरफ्तार आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। अदालत ने पुलिस को जांच पूरी करने और नेटवर्क के अन्य सदस्यों का पता लगाने के निर्देश दिए हैं।

अंतरराष्ट्रीय लिंक की जांच-

पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस गिरोह के तार विदेशों से भी जुड़े हो सकते हैं। ठगी से हासिल रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेजा जाता था। साइबर अपराध शाखा अब अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर धन के प्रवाह और नेटवर्क की गहन जांच कर रही है।

पुलिस का मानना है कि आरोपियों ने तकनीकी जानकारी रखने वाले युवाओं को रोजगार के नाम पर काम पर रखा था और उन्हें प्रशिक्षित कर अमेरिकी नागरिकों को कॉल करने के लिए लगाया गया था।

समापन संदेश-

मुंबई पुलिस द्वारा उजागर की गई इस हाई-टेक ठगी ने एक बार फिर दिखाया है कि साइबर अपराध किस तरह बदलते स्वरूप में लोगों को निशाना बना रहा है। जहां पहले धोखाधड़ी स्थानीय स्तर तक सीमित रहती थी, वहीं अब अपराधी सीमाओं के पार जाकर विदेशी नागरिकों को भी निशाना बना रहे हैं।

अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से न केवल शहर बल्कि देश की छवि भी प्रभावित होती है, इसलिए ऐसे अपराधों पर सख्ती से रोक लगाना जरूरी है। आने वाले दिनों में पुलिस और साइबर सुरक्षा एजेंसियां मिलकर इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश करेंगी, ताकि भविष्य में इस तरह की ठगी को रोका जा सके।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

Next Story